← अनुक्रमणिका

मृत्यु

  • ( १ ) ( पुरुष ) अधर्मकी स्त्री निर्ऋतिके गर्भसे उत्पन्न तीन पुत्रोंमेंसे एक । यह सब प्राणियोंका नाशक है । इसकी पत्नी या पुत्र कोई नहीं है; क्योंकि यह सबका अन्तकृत् है ( आदि० ६६ । ४०-४५ ) ।
  • जापक ब्राह्मणके पास इसका आना ( शान्ति० १२९ । २२ ) ।
  • अर्जुनके नामक व्याध और सर्पके साथ इसका संवाद ( अनु० १ । ५०-६८ ) ।
  • सुदर्शनका मृत्युपर विजयका वर्णन ( अनु० २ । १४८-८० ) ।
  • ( २ ) ( स्त्री ) ब्रह्माके शरीरसे नारीरूपमें इसकी उत्पत्ति ( द्रोण० ५३ । १७-१८; शान्ति० २५० । १५ ) ।
  • ब्रह्माद्वारा संहारकार्यके सौंपे जानेपर इसका रोदन ( द्रोण० ५३ । २२-२३; शान्ति० २५७ । २९ ) ।
  • इसकी घोर तपस्या ( द्रोण० ५४ । १७-२६; शान्ति० २५८ । १५-२४ ) ।
  • ब्रह्मासे वरकी याचना ( द्रोण० ५४ । ३०-३२ ) ।
  • इसका संहारकार्य स्वीकार करना ( द्रोण० ५४ । ४४; शान्ति० २५८ । ३० ) ।
  • इसकी प्रबलताका वर्णन ( शान्ति० ३१९ अध्याय ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in