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म्लेच्छ

  • एक जाति और जनपद । नन्दिनी गौके फेनसे म्लेच्छ जातिकी सृष्टि हुई । उन म्लेच्छ सैनिकोंने विश्वामित्रकी सेनाको तितर-बितर कर दिया ( आदि० १७४ । ३८-४० ) ।
  • भीमसेनने समुद्रतटवर्ती म्लेच्छों और उनके अधि पतियोंको जीतकर उनसे 'कर' के रूपमें भाँति-भाँतिके रत्न प्राप्त किये थे ( सभा० ३० । २४-२७ ) ।
  • समुद्रके द्वीपोंमें निवास करनेवाले म्लेच्छजातीय राजाओंको माद्रीकुमार सहदेवने परास्त किया था ( सभा० ३१ । ६६ ) ।
  • नकुलने भी उनपर विजय पायी थी ( सभा० ३२ । १६ ) ।
  • समुद्रके टापुओंमें रहनेवाले म्लेच्छोंके साथ राजा भगदत्त युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञमें पधारे थे ( सभा० ३४ । १० ) ।
  • म्लेच्छोंके स्वामी भगदत्त भेंट लेकर युधिष्ठिरके यहाँ आये थे ( सभा० ५१ । १४ ) ।
  • जब प्रलयका पूर्वरूप आरम्भ हो जाता है, उस समय इस पृथ्वीपर बहुत-से म्लेच्छ राजा राज्य करने लगते हैं ( वन० १८८ । ३४ ) ।
  • विष्णुयशा कल्कि फैले हुए म्लेच्छोंका संहार करेंगे ( वन० १९० । १७ ) ।
  • कर्णने अपनी दिग्विजयमें म्लेच्छ राजाओंको जीत लिया था ( वन० २५४ । १९-२१ ) ।
  • एक भारतीय जन-पदका नाम म्लेच्छ है ( भीष्म० ९ । ५० ) ।
  • म्लेच्छ जातीय अङ्ग भीमसेनद्वारा युद्धमें मारे गये ( द्रोण० २६ । १७ ) ।
  • नन्दिनी गौसे उत्पन्न हुए म्लेच्छ अर्जुनपर तीखे बाणोंकी वर्षा करते थे; परंतु अर्जुनने दाढ़ीभरे मुखवाले उन सभी म्लेच्छोंका संहार कर डाला ( द्रोण० ९३ । ४२-४५ ) ।
  • वीर सात्यकिके द्वारा रणभूमिमें आहत होकर सैकड़ों म्लेच्छ प्राणोंसे हाथ धो बैठे थे ( द्रोण० ११७ । ४३ ) ।
  • म्लेच्छोंने पाण्डवसेनापर अत्यन्त क्रोधी गजराज बढ़ाये थे ( कर्ण० २२ । १० ) ।
  • म्लेच्छ जातीय अङ्गराज पाण्डुकुमार नकुलद्वारा मारा गया ( कर्ण० २२ । १८ ) ।
  • म्लेच्छ सैनिक दुर्योधनकी सहायताके लिये बड़े रोषपूर्वक लड़ रहे थे । अर्जुनके सिवा और किसीके लिये उन्हें जीतना असम्भव था ( कर्ण० ७३ । १९-२२ ) ।
  • अर्जुनको अश्वमेधीय अश्वकी रक्षाके समय बहुत से म्लेच्छ सैनिकोंका सामना करना पड़ा ( आश्व० ७३ । २५ ) ।
  • युधिष्ठिरकी यज्ञ-शालामें ब्राह्मणोंके देनेके बाद जो धन पड़ा रह गया, उसे म्लेच्छजातिके लोग उठा ले गये ( आश्व० ८९ । २६ ) ।

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