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युवनाश्व

  • इक्ष्वाकुवंशके एक सुप्रसिद्ध नरेश; जिन्होंने प्रचुर
  • दक्षिणा देकर बहुत-से यज्ञोंका अनुष्ठान किया था । जिन्होंने एक हजार अश्वमेध यज्ञ किये थे ( वन० १२६ । ५-६ ) ।
  • ये राजा सुद्युम्नके पुत्र थे ( वन० १२६ । १० ) ।
  • श्रुत हुए इनके द्वारा अभिमन्त्रित जलका पान ( वन० १२६ । १५ ) ।
  • इनकी बायीं कुक्षिसे मान्धाताका जन्म ( वन० १२६ । १७ ) ।
  • इन्हें महाराज रैवतने खड्गकी प्राप्ति हुई और इन्होंने रघुको वह खड्ग प्रदान किया ( शान्ति० १६६ । १८ ) ।
  • इनके द्वारा मांस-भक्षण-निषेध और उनसे इन्हें परावर-तत्त्वका ज्ञान ( अनु० ११३ । ४१ ) ।
  • ( २ ) विश्वगश्व-कुमार आदिके पुत्र, जो आवके पिता थे ( वन० २०२ । १३ ) ।
  • ( ३ ) बृहद्रथके पुत्र, जिन्होंने सब प्रकारके रत्न, अभीष्ट स्त्रियाँ और सुरम्य गृह दान करके स्वर्गका निवास पाया ( शान्ति० २३४ । १५ ) ।

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