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अश्विनीकुमार–

  • नासत्य और दस नामक दो भाई, जो देवताओंके अन्तर्गत हैं। त्वष्टाकी पुत्री संज्ञाने अश्विनीरूप धारण करके भगवान् सूर्यके अंशसे अन्तरिक्षमें इन्हें उत्पन्न किया। ये संज्ञके नासको निकले हैं (आदि० ६६।३५; अनु० १५०।१७–१८)।
  • ये ब्रह्मा आदि अन्य देवताओंके क्रमसे स्वयं भी अण्डसे उत्पन्न हुए (आदि० ९।३४)।
  • आपोदौम्यके शिष्य उपमन्युके द्वारा इनकी स्तुति (आदि० १७०–६८)।
  • इनके द्वारा उपमन्युको वरदान (आदि० १७३)।
  • इन्होंने माद्रीके गर्भसे नकुल और सहदेवको उत्पन्न किया (आदि० ९५।६३)।
  • ये देवताओंके साथ विमानपर बैठकर द्रौपदीका स्वयंवर देखने आये थे (आदि० १८६।६)।
  • खाण्डव-दाहके समय श्रीकृष्ण-अर्जुनके युद्धके लिये आए हुए देवताओंमें ये भी थे (आदि० २३३।३३)।
  • इन्होंने सुकन्यासे अपनेको पतिरूपमें वरण करनेका आग्रह करके उसके सतीत्वकी परीक्षा ली (वन० १२३।१०)।
  • अपनेको देवताओंका श्रेष्ठ वैद्य बताया (वन० १२३।१२)।
  • इनके द्वारा च्यवनको यौवनदान तथा सुकन्याद्वारा पतिकी पहचान (वन० १२३।१३–२९)।
  • च्यवन मुनिके प्रभावसे इनका शर्यातिके यज्ञमें सोमपान (वन० २३०।२४ से २३५।१०)।
  • इन अश्विनीकुमारोंने मान्धाताके पिताके पेटसे बाहर निकाला (द्रोण० ६।१४)।
  • इनके द्वारा स्कन्दको वर्धन और नन्दन नामक दो पार्षद प्रदान (शल्य० ४५।३८)।
  • इन्हें घीकी आहुति तथा उसके दानसे अधिक प्रसन्नता होती है (अनु० ८६।७)।
  • आश्विनमासमें ब्राह्मणको घी दान करनेवाले पुरुषको अश्विनीकुमार रूप देते हैं (अनु० ८५।१०)।
  • इक्कीस तथा उन्नतीस दिनोंपर एक समय भोजन करनेवालोंको अश्विनीकुमारोंके लोककी प्राप्ति होती है (अनु० १००।१५, १२६)।
  • कीर्तनीय नामोंमें नामनिर्देश (अनु० १५०।८१)।
  • अश्विनीकुमारतीर्थ–जिसमें स्नान करनेसे रूपकी प्राप्ति होती है (वन० ८३।१०)।

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