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रावण

  • एक राक्षसराज, जो अत्यन्त दुरात्मा था और सीताजीको हर ले गया था ( वन० २७० । ३३-३४ ) ।
  • यह विश्वस्रवाका पुत्र था । इसकी माताका नाम पुष्पोत्कटा था । इसीका छोटा भाई कुम्भकर्ण था ( वन० २७५ । ७ ) ।
  • इसकी अद्भुत तपस्या और ब्रह्माजीसे इसका वर माँगना ( वन० २७५ । १६-२५ ) ।
  • इसे कुबेरका शाप ( वन० २७५ । ३४-३५ ) ।
  • मारीचके पास जाकर उसे कपटमृग बननेके लिये बाध्य करना ( वन० २७८ । १ ) ।
  • इसके द्वारा सीताजीका अपहरण ( वन० २७८ । ४३ ) ।
  • इसके द्वारा जटायुके पंखोंका काटा जाना ( वन० २७९ । ६ ) ।
  • इसे नलकूबरके शापकी चर्चा ( वन० २८० । ५०-५१ ) ।
  • इसका मारीचको अपने अनुकूल होनेके लिये समझाना ( वन० २८१ । ४७ ) ।
  • अङ्गद का रावणको श्रीरामके संदेश सुनाना ( वन० २८५ । १०-१६ ) ।
  • इसका कुम्भकर्णको युद्धके लिये जगाना ( वन० २८६ । २० ) ।
  • इन्द्रजित्को युद्धके लिये भेजना ( वन० २८८ । २ ) ।
  • सीताजीको मार डालनेके लिये उद्यत होना ( वन० २८९ । २७ ) ।
  • श्रीरामद्वारा इसका वध ( वन० २९० । ३० ) ।

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