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रैभ्य

  • ( १ ) एक ऋषि, जो युधिष्ठिरकी सभामें विराजमान होते थे ( सभा० ४ । १६ ) ।
  • ये भरद्वाज मुनिके सखा थे। इनके दो पुत्र थे—अर्वावसु और परावसु। पुत्रोंसहित रैभ्य मुनिने यवक्रीत मुनिके पास जाकर उनसे ( वन० १३५ । ५७—५८ ) ।
  • इनका यवक्रीतपर कुपित हो अपनी जटाको आहुतिद्वारा एक कृत्या और एक राक्षस उत्पन्न करना तथा उन्हें यवक्रीतको मार डालनेका आदेश देना ( वन० १३६ । ८—१० ) ।
  • भरद्वाज मुनिका इन्हें अपने ज्येष्ठ पुत्रके हाथसे मारे जानेका शाप देना ( वन० १३७ । ५ ) ।
  • अन्य पुत्र अर्वावसुद्वारा हिंसक पशुके धोखेमें इनकी मृत्यु ( वन० १३८ । ५ ) ।
  • अपने दूसरे पुत्र अर्वावसुके प्रयत्नसे इनका पुनर्जीवन ( वन० १३८ । २०—२३ ) ।
  • ये अङ्गिराके पुत्र थे ( शान्ति० २०८ । २६—२७ ) ।
  • इनका उपरिचर वसुके यज्ञमें सदस्य होना ( शान्ति० ३३६ । ७ ) ।
  • प्रयाणके समय भीष्म- जीको देखने आये थे ( अनु० ८४ । १३ ) ।
  • ( २ ) एक मुनि, जिन्हें वरुणसे धर्मका उपदेश प्राप्त हुआ था और जिन्होंने अपने पुत्र दिक्पाल कृतिको इस धर्मका शिक्षा दी ( शान्ति० २४८ । ४२—४३ ) ।

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