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अष्टवसु –

  • गणदेवता। धर्मद्वारा दक्षकी विभिन्न कन्याओंसे उत्पन्न। इनकी संख्या आठ है, जिनके नाम इस प्रकार हैं-धर, ध्रुव, सोम, अहः, अनिल, अनल, प्रत्यूष तथा प्रभास (आदि० ६६।१७–२०)।
  • पुराणोंमें इनके नामोंके सम्बन्धमें मतभेद पाया जाता है। जैसे विष्णुपुराण-के अनुसार-आप, ध्रुव, सोम, धर्म, अनिल, अनल, प्रत्यूष तथा प्रभास (विष्णु० १।१५)।
  • भागवतके अनुसार- द्रोण, प्राण, ध्रुव, अर्क, अग्नि, दोष, वसु और विभावसु (भागवत ६।६)।
  • हरिवंशके अनुसार-आप, धर ध्रुव, सोम, अनिल, अनल, प्रत्यूष तथा प्रभास (६।३)।
  • इससे परस्पर कोई विरोध नहीं समझना चाहिये; क्योंकि एक व्यक्तिके अनेक नाम हो सकते हैं और विभिन्न स्थानोंमें उसे अलग-अलग नामोंसे कहा जा सकता है। इन सबका विशेष परिचय उन-उन नामोंमें देखना चाहिये। गङ्गाके गर्भसे शान्तनुद्वारा इन सबका जन्म (आदि० ९८।१२)।
  • वसिष्ठके द्वारा इन सबको मनुष्ययोनिमें जन्म लेनेका शाप (आदि० ९९।२२)।
  • प्रार्थना करनेपर ‘धो’ के अतिरिक्त इन सबको ययातिने शापसे मुक्त होनेका वसिष्ठजीद्वारा आश्वासन (आदि० ९९।२८–२९)।
  • इनके द्वारा परशुरामसे युद्ध करते समय भीष्मको प्रस्वापास्त्र का दान (उद्योग० १८२।११–१३)।
  • मृत्युके लियेविचार करते हुए भीष्मके विचारका समर्थन ( भीष्म० १११।३० )

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