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रोहिणी

  • ( १ ) क्रोधवशा-कुमारी सुरभिकी पुत्री ( गौ ) ।
  • इनकी विमला और अनला नामकी दो कन्याएँ थीं। इनसे गाय-बैलोंकी उत्पत्ति हुई ( सभा० ६६ । ६०— ६१ ) ।
  • ( २ ) चन्द्रमाकी पत्नी ( आदि० १९८ । ५ ) ।
  • प्रजापति दक्षकी नक्षत्रसंज्ञक सत्ताईस कन्याओंमें यह प्रमुख थी और अपने रूप-वैभवसे अन्य सब बहिनोंकी अपेक्षा विशेष बढ़ी-चढ़ी थी; इसीलिये पतिकी हृदय- वल्लभा हो गयी थी ( शल्य० ३५ । ४५—४८ ) ।
  • इसे असि ( खड्ग ) गोत्रका कहा गया है ( शान्ति० १९६ । ८२ ) ।
  • रोहिणी नक्षत्रमें पके हुए फलके गूदे, अन्न, घी, दूध पीने योग्य पदार्थ ब्राह्मणको दान करनेसे दाताको शुभफल मिलता है ( अनु० ६४ । ६ ) ।
  • संतानकी
  • (१) कामनावाले पुरुषको रोहिणी नक्षत्रमें श्राद्ध करना चाहिये ( अनु० ८९ । ३ ) ।
  • चन्द्रव्रतमें चन्द्रमाके नक्षत्रमय स्वरूपका चिन्तन करते समय रोहिणीको उनकी पिण्डलियोंमें स्थित मानकर तत्सम्बन्धी मन्त्रसे उक्त अङ्गकी पूजा करे ( आदि० ११० । ३ ) ।
  • (२) वसुदेवजीकी भार्या तथा बलरामजीकी माता ( आदि० १९६ । ३३; सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ ) ।
  • ये वसुदेवजीकी मृत्युके पश्चात् उनके शवके साथ ही चितापर दग्ध हो गयीं ( मौसल० ७ । १८, २४ ) ।
  • (३) मनु ( भानु ) नामक अग्निकी तीसरी भार्या निशाके गर्भसे उत्पन्न एक कन्या, जो 'स्विष्टकृत्' नामसे प्रसिद्ध है। इसका नाम रोहिणी है। यह किसी अशुभ कर्मके कारण हिरण्यकशिपुकी पत्नी हो गयी थी ( वन० २२१ । १५, १८-१९ ) ।

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