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लक्ष्मण

  • (१) महाराज दशरथके चार पुत्रोंमेंसे एक,
  • सुमित्राके ज्येष्ठ पुत्र तथा शत्रुघ्नके सहोदर भाई ( वन० २७४ । ७-८ ) ।
  • श्रीरामके साथ इनका वन-गमन ( वन० २७७ । १२ ) ।
  • सीताके कठोर वचन सुनकर उन्हें अकेली छोड़कर इनका रामके पास जाना ( वन० २७८ । ३०-३१ ) ।
  • सीताको छोड़कर आनेके कारण श्रीरामद्वारा इनकी भर्त्सना ( वन० २७९ । १२-१४ ) ।
  • इनका श्रीरामके साथ जटायुके पास जाना ( वन० २७९ । २० ) ।
  • श्रीरामके साथ वनमें घूमते हुए इनका कबन्धद्वारा पकड़ा जाना और दुखी होकर विलाप करना ( वन० २७९ । ३०-३४ ) ।
  • श्रीरामका आश्वासन पाकर इनका कबन्धका दाहिनी बाँह काटना और उसके पसलीपर प्रहार करके उसे मार डालना ( वन० २७९ । ३६-३९ ) ।
  • श्रीरामके कहनेसे किष्किन्धा में सुग्रीवसे उनका संदेश कहना ( वन० २८२ । १४ ) ।
  • श्रीरामने विभीषणको इनका मित्र बनाया ( वन० २८३ । १४ ) ।
  • इनका लंकामें राक्षसोंको चुन-चुनकर मार गिराना ( वन० २८४ । ४० ) ।
  • इनके द्वारा कुम्भकर्णका वध ( वन० २८७ । १७-१९ ) ।
  • इनका प्रमाथी और वज्रवेगके साथ युद्ध ( वन० २८७ । २५ ) ।
  • मेघनादके बाणोंसे लक्ष्मण और श्रीराम दोनों भाइयोंका मूर्च्छित होना ( वन० २८८ अध्याय ) ।
  • इनके द्वारा मेघनादका वध ( वन० २८९ । २३ ) ।
  • (२) महाभारतमें आये हुए लक्ष्मणके नाम—इक्ष्वाकुनन्दन, काकुत्स्थ, राघव, रामानुज, सौमित्रि ।
  • (३) दुर्योधनका महारथी पुत्र । अभिमन्युके साथ इसका युद्ध ( भीष्म० ५५ । ८-१३ ) ।
  • अभिमन्युके साथ युद्ध और उनके द्वारा इनका पराजित होना ( भीष्म० ७३ । ३३-३७ ) ।
  • क्षत्रदेवके साथ युद्ध ( द्रोण० ९५ । ४९ ) ।
  • समुद्री प्रान्तोंके अधिपति के साथ युद्ध ( द्रोण० ३५ । ३४-३५ ) ।
  • अभिमन्युद्वारा वध ( द्रोण० ४६ । १० ) ।
  • इनके द्वारा अम्बष्ठपुत्रके मारे जानेकी चर्चा ( कर्ण० ६ । १०-११ ) ।
  • इसके द्वारा शिखण्डीके पुत्र क्षत्रदेवके वधकी चर्चा ( कर्ण० ६ । २६-२७ ) ।
  • व्यासजीके आवाहन करनेपर गङ्गाजीके जलसे प्रकट हुए कौरव-पाण्डव पक्षके लोगोंमें यह भी था ( आश्रम० ३२ । १९ ) ।

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