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अष्टावक्र -

  • महर्षि कहोड़के द्वारा उद्दालककुमारी सुजाताके गर्भसे उत्पन्न एक मुनि । पिताके अध्ययनमें बालकका दोष निकालना ( वन० १३२।८-१० )।
  • इनका राजा जनकके यज्ञमें जाना ( वन० १३२।२३ )।
  • द्वारपाल-से वार्तालाप ( वन० १३३।५-१६ )।
  • राजा जनकसे प्रश्नोत्तर ( वन० १३३।२०-३० )।
  • बंदीके साथ शास्त्रार्थ करके उसे हराना ( वन०१३४।१९-२९ )।
  • समझमें ज्ञान करनेसे इनके अङ्गोंका सीधा होना ( वन० १३५।२९ )।
  • महर्षि वदान्यसे उनकी कन्या माँगा ( अनु० १९१।१९ )।
  • महर्षि वदान्यके कहनेसे इनका उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान ( अनु० १९१।२७ )।
  • कुबेरके भवनमें विश्राम ( अनु० १९१।४०-४१ )।
  • नारी-रूपधारिणी उत्तर दिशाके साथ संवाद ( अनु० १९२।७३ से २१।११ तक )।
  • वदान्य ऋषिने अपना सब समाचार कहना ( अनु० २१९।१५ -१६ )।
  • वदान्यकी कन्या सुप्रभाके साथ इनका विवाह ( अनु० २१९।८ )।

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