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वरुण

  • (१) कश्यपद्वारा अदितिके गर्भसे उत्पन्न द्वादश आदित्योंमें एक ( आदि० ६५ । १५ ) ।
  • इनकी ज्येष्ठ पत्नी देवीने इनके वीर्यसे बल नामक एक पुत्रको और सुरा नामवाली कन्याको जन्म दिया था ( आदि० ६६ । ५२ ) ।
  • महर्षि वसिष्ठ इनके पुत्ररूपसे उत्पन्न हुए थे ( आदि० ९२ । ५ ) ।
  • ये अर्जुनके जन्म-समयमें वहाँ उपस्थित हुए थे ( आदि० १२२ । ५६ ) ।
  • ये चौथे लोकपाल हैं; अदितिके पुत्र, जलके स्वामी तथा जलमें ही निवास करनेवाले हैं । अग्निनें देवोंका स्मरण किया और इन्होंने उन्हें दर्शन दिया । अग्निने इनसे दिव्य धनुष, अक्षय तरकस और कवचरूपी रथ माँगे और वरुणने वे सब वस्तुएँ उन्हें दे दीं ( आदि० २२४ । १—६ ) ।
  • इन्होंने पाश और अशानि लेकर श्रीकृष्ण और अर्जुनपर धावा किया था ( द्रोण० १२२—३७ ) ।
  • नारदजीद्वारा इनकी दिव्यसभाका वर्णन ( सभा० ९ अध्याय ) ।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें रहकर उनकी उपासना करते हैं ( सभा० ११ । ५१ ) ।
  • इनके द्वारा अर्जुनको पाशनामक अस्त्रका दान ( वन० ४१ । २७—३२ ) ।
  • इनका राजा नलको दमयन्तीके स्वयंवरके अवसरपर वर देना ( वन० ५० । १८ ) ।
  • इन्होंने अन्य देवताओंके साथ 'विश्वामित्रयूप' में तपस्या की थी; अतः वह स्थान परम पवित्र माना गया है ( वन० ९० । १६ ) ।
  • ऋचीक मुनिको वरुणदेवने एक हजार श्यामकर्ण घोड़े प्रदान किये थे ( वन० ११५ । २७ ) ।
  • राजा जनकके दरबारका शास्त्राथी पण्डित बन्दी इन्हींका पुत्र था ( वन० १३४ । १४ ) ।
  • इनके द्वारा सीताजीकी शुद्धिका समर्थन ( वन० २९१ । २४ ) ।
  • इन्होंने सौ वर्षोंतक गाण्डीव धनुष धारण किया था ( विराट० ४३ । ६ ) ।
  • इनकी पत्नीका नाम गौरी था ( उद्योग० ११० । ९ ) ।
  • कभी श्रीकृष्णने इन्हें जीत लिया था ( उद्योग० १३० । ४९ ) ।
  • इनके द्वारा श्रुतायुधकी माता पर्णाशाको वरदान ( द्रोण० १२ । ४०—४१ ) ।
  • श्रुतायुधको गदा प्रदान कर उसके प्रयोगका नियम बताना ( द्रोण० १२ । ५०—५१ ) ।
  • इनके द्वारा स्कन्दको यम और अतियम नामक दो पार्षद प्रदान ( शल्य० ४५ । ४५-४६ ) ।
  • इनका स्कन्दको एक नाग ( हाथी ) भेंट करना ( शल्य० ४६ । ५२, अनु० ८६ । २५ ) ।
  • इनका देवताओंद्वारा जलेश्वर-पदपर अभिषेक ( शल्य० ४७ । ९-१० ) ।
  • इन्होंने सरस्वती नदीके यमुनातीर्थमें राजसूय यज्ञ किया था ( शल्य० ४९ । ११-१२ ) ।
  • इनके द्वारा उत्थ्यकी भार्या भद्राका अपहरण ( अनु० १५४ । १२ ) ।
  • उदथ्यद्वारा समुद्रका सारा जल पी जानेपर इनका उनकी पत्नी वापस देना ( अनु० १५४ । २८ ) ।
  • ये परमधामगमनके समय बलरामजीके स्वागतके लिये आये थे ( मौसल० १ । ७ ) ।
  • अग्निने वरुणको वापस देनेके लिये अर्जुनसे गाण्डीव धनुष और दिव्य तरकस जलमें डलवा दिये थे ( महाप्र० १ । ४१-४२ ) ।

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