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वसिष्ठाश्रम

  • निषीरा सङ्गमके समीपका एक तीर्थभूत आश्रम, जो तीनों लोकोंमें विख्यात है । यहाँ स्नान करनेवाला मनुष्य वाजपेय यज्ञका फल पाता है ( वन० ८४ । १४०-१४१ ) ।
  • (१) चेदिदेशके राजा
  • ६३ । १-२ ) ।
  • ( देखिये उपरिचर वसु ) ( २ ) धर्म-देवद्वारा दक्षकन्याके गर्भसे आठ पुत्र उत्पन्न हुए, जो वसुगण कहलाते हैं ( आदि० ६६ । १७-१८ ) ।
  • ( देखिये अष्टवसु ) ।
  • ( ३ ) महाराज इलिनके द्वारा रथनन्तरीके गर्भसे उत्पन्न । इनके चार भाई और थे, जिनके नाम हैं दुष्यन्त, शूर, भीम और प्रवसु ( आदि० ९४ । १७-१८ ) ।
  • ( ४ ) एक विद्वान् ब्राह्मण मुनि, जिनके पुत्रका नाम पैल था ( सम्भव है ये जमदग्निपुत्र वसु ही हों ) ( सभा० ३३ । ३५ ) ।
  • ( ५ ) जमदग्निके एक पुत्र; इनकी माता रेणुका थीं । इनके भाई रमणवान्, सुषेण, विरवावसु तथा परशुराम थे । पिताकी आज्ञा न माननेसे इन्हें पिताद्वारा शाप प्राप्त हुआ ( वन० ११६ । १०-१२ ) ।
  • परशुरामद्वारा इनका शापसे उद्धार हुआ ( वन० ११६ । १७ ) ।
  • ( ६ ) कृमिकुलका एक कुलाङ्गार राजा ( उद्योग० ७४ । १३ ) ।
  • ( ७ ) भगवान् शिवका एक नाम ( अनु० १० । १४० ) ।
  • ( ८ ) भगवान् विष्णुका एक नाम ( अनु० १४९ । २५ ) ।

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