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वसुमन ( वसुमान् )

  • (१) एक प्राचीन नरेश, जो अयोध्यानरेश हर्यश्वद्वारा ययातिकन्या माधवीके गर्भसे उत्पन्न हुए थे । इनके पास ही स्वर्गसे गिरे हुए राजा ययाति इनसे मिलकर सत्सङ्गके प्रभावसे स्वर्गलोकमें चले गये ( आदि० ८६ । ५६ ) ।
  • स्वर्गसे गिरते समय राजा
  • ययातिसे इनकी भेंट ( आदि० ९३ । १ ) ।
  • इनके द्वारा ययातिको पुण्यदानका आश्वासन ( आदि० ९३ । ३—५ ) ।
  • अपनी माता माधवीसे इनका ययातिका परिचय पूछना ( आदि० ९३ । १३ के बाद दाक्षिणात्य पाठ ) ।
  • अष्टक आदि राजाओंके साथ इनका स्वर्गाभिगमन ( आदि० ९३ । १६ ) ।
  • ये यमसभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १३ ) ।
  • इन्होंने तपस्याके कारण प्रचुर यश और प्रचुर धन प्राप्त किया था ( वन० १९८ । १०—१२ ) ।
  • विश्वामित्रके पुत्र अष्टकके अश्वमेध यज्ञमें ये पधारे थे ( वन० १९८ । १—२ ) ।
  • नारदजीका इनको अपने और दिविसे भी पहले स्वर्गलोकमें नीचे उतरनेका अधिकारी बताना ( वन० १९८ । ११—१५ ) ।
  • ये इन्द्रके रथपर आरूढ़ हो विराटनगरके आकाशमें अर्जुन और कृपाचार्यका युद्ध देखनेके लिये आये थे ( विराट० ५६ । ९—१० ) ।
  • नैमिषारण्यमें वाजपेय यज्ञद्वारा श्रीहरिकी आराधना करते हुए वसुमनु आदिके नाम ययातिंका स्वर्गसे नीचे गिरना ( उद्योग० १२१ । १०—११ ) ।
  • ये दानपतिके नामसे विख्यात थे । इन्होंने ययातिको अपना पुण्यफल प्रदान किया ( उद्योग० १२२ । ३—५ ) ।
  • ये कोसलदेशके राजा थे । बृहस्पतिके राज्यकी वृद्धि और हानिके विषयमें इनका प्रश्न ( शान्ति० ६८ । ६—७ ) ।
  • वामदेवजीसे राजधर्मके विषयमें इनका पूछना ( शान्ति० ९२ । ४ ) ।
  • (२) एक राजा, जो युधिष्ठिरकी सभामें विराजमान होते थे ( सभा० ४ । ३२ ) ।
  • इन्हें पाण्डवोंकी ओरसे रण-निमन्त्रण भेजनेका निश्चय किया गया था ( उद्योग० ४ । २१ ) ।
  • (३) एक अग्नि या अग्निहोत्रसम्बन्धी अग्नि । यदि रजस्वला स्त्री छू दे तो इन ( वसुमान् अग्नि ) के लिये अप्पलक चक्रद्वारा आहुति देनेकी विधि है ( वन० २२१ । २७ ) ।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें विद्यमान होते हैं ( सभा० ११ । ३० ) ।
  • (४) एक जनकवंशी राजकुमार, जिन्हें एक ऋषिद्वारा धर्मविषयक उपदेश प्राप्त हुआ था ( शान्ति० ३०९ अध्याय ) ।

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