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वामन

  • (१) कश्यपद्वारा कद्रूके गर्भसे उत्पन्न एक नाग ( आदि० ३५ । ६; उद्योग० १०१ । १० ) ।
  • (२) भगवान् विष्णुके अवतार । देवताओंकी प्रार्थनासे भगवान् नारायणका वामनरूपमें माता अदितिके गर्भसे प्रादुर्भाव, ब्रह्मचारी वामनके द्वारा बलिसे तीन पग भूमिकी याचना ( सभा० ३८ । २९ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ७८९ ) ।
  • त्रिभुवनको नापते समय इनका अद्भुत रूप धारण करना । इनके चरणके आघातसे गङ्गाका प्राकट्य । इनके द्वारा दानवोंका भीषण संहार ( सभा० ३८ । २९ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ७९० ) ।
  • इनके द्वारा राजा बलिका बन्धन; बलिको सुतललोकमें भेजकर इनके द्वारा इन्द्रको त्रिभुवनके राज्यका दान ( सभा० ३८ । २९ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ७९०-७९१ ) ।
  • (३) कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित एक त्रिभुवनविख्यात तीर्थ, जहाँ विष्णुपदमें स्नान और वामन देवताका पूजन करनेसे मनुष्य सब पापोंसे शुद्ध हो भगवान् विष्णुके लोकमें जाता है ( वन० ८३ । १०३ ) ।
  • (४) एक सर्वपापविनाशक तीर्थ, जहाँकी यात्रा करके भगवान् श्रीहरिका दर्शन करनेसे मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता ( वन० ८४ । १३०-१३१ ) ।
  • (५) गरुड़की प्रमुख संतानोंमेंसे एक ( उद्योग० १०१ । १० ) ।
  • (६) क्रौञ्चद्वीपका एक पर्वत ( भीष्म० १२ । १८ ) ।
  • (७) चार दिग्गजोंमेंसे एक । शेष तीनोंके नाम हैं—ऐरावत, सुप्रतीक और अञ्जन ( भीष्म० १२ । ३३ ) ।
  • यह घटोत्कचके साथी एक राक्षसका वाहन था ( भीष्म० ५ । ५७ ) ।

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