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विकर्ण

  • (१) धृतराष्ट्रका एक महारथी पुत्र । ग्यारह महा-रथियोंमेंसे एक ( आदि० ६३ । १११ ) ।
  • धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० ६७ । ९४; आदि० ११६ । ४ ) ।
  • द्रुपदपर चढ़ाई करनेवाले दुर्योधन आदि द्रोण-शिष्योंमें यह भी था ( आदि० १३० । १९—२१ ) ।
  • यह द्रौपदीके स्वयंवरमें भी गया था ( आदि० १८५ । २ ) ।
  • युद्धाग्निसे आते हुए पाण्डवोंकी अगवानीके लिये इसका जाना ( आदि० २०९ । १३ ) ।
  • भरी सभामें द्रौपदीके प्रश्नपर मौन हुए राजाओंके बीच इसका न्याय-पूर्ण निर्णय ( सभा० ६८ । ११ ) ।
  • कर्णद्वारा इसे फटकार ( सभा० ६८ । ३० ) ।
  • विराटकी गौओंके हरणके समय अर्जुनपर आक्रमण ( विराट० ५४ । ९ ) ।
  • अर्जुनसे पराजित होकर भागना ( विराट० ५४ । १० ) ।
  • अर्जुनसे युद्ध और घायल होकर रथसे नीचे गिरना ( विराट० ५५ । ४२ ) ।
  • गजराजद्वारा अर्जुनपर आक्रमण और हारकर भागना ( विराट० ५५ । ६—१० ) ।
  • प्रथम दिनके संग्राममें सुतसोमके साथ इसका द्वन्द्वयुद्ध ( भीष्म० ४५ । ५८-५९ ) ।
  • सहदेवके साथ संग्राम ( भीष्म० ७१ । २१-२२ ) ।
  • अभिमन्युद्वारा पराजय ( भीष्म० ७८ । २१-२२; भीष्म० ८४ । ४०-४२ ) ।
  • घटोत्कचद्वारा पराजय ( भीष्म० ९२ । १३ ) ।
  • नकुलके साथ द्वन्द्व युद्ध ( भीष्म० ११० । ११-१२; भीष्म० १११ । ३४-३६ ) ।
  • भीमसेनके साथ युद्ध ( भीष्म० ११३ अध्याय ) ।
  • शिखण्डीके साथ युद्ध ( द्रोण० २५ । ३१ ) ।
  • भीमसेनके साथ युद्ध ( द्रोण० १०६ । १२ ) ।
  • नकुलके साथ युद्ध ( द्रोण० १०७ । १३ ) ।
  • नकुलद्वारा इसकी पराजय ( द्रोण० १०७ । ३० ) ।
  • भीमसेनद्वारा इसका वध और इसके लिये उनका शोक प्रकट करना ( द्रोण० १३७ । २९-३५ ) ।
  • इसके मारे जानेकी चर्चा ( कर्ण० ५ । ८-९ ) ।
  • ( १ ) एक भारतीय जनपद । यहाँके सैनिक दुर्योधनके साथ रहकर शकुनिकी सेनाका संरक्षण कर रहे थे ( भीष्म० ५१ । १५ ) ।
  • ( २ ) एक ऐश्वर्यशाली शिवभक्त ऋषि, जिन्होंने शिवजीको प्रसन्न करके मनोवाञ्छित सिद्धि प्राप्त की थी ( अनु० १४ । १९ ) ।

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