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वितस्ता

  • काश्मीर एवं पञ्जनद प्रदेशकी झेलम नदी, जो वरुणकी सभामें रहकर उनकी उपासना करती है ( सभा० ९ । १९ ) ।
  • इसमें स्नान करके देवताओं और पितरोंका तर्पण करनेसे मनुष्यको वाजपेय यज्ञका फल प्राप्त होता है । काश्मीरमें नागराज तक्षकका वितस्ता नामसे प्रसिद्ध भवन है, जो सब पापोंका नाश करनेवाला है । वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य वाजपेय यज्ञके फल और उत्तम गतिका भागी होता है ( वन० ८२ । ८९-९१ ) ।
  • इसके प्रवाहमें ब्राह्मणोंके चार सौ श्यामकर्ण घोड़े वह गये थे ( उद्योग० ११६ । १८ ) ।
  • इसका जल भारतवासी पीते हैं ( भीष्म० ९ । १६ ) ।
  • मनुष्य उपवास करके तरङ्गमालिनी वितस्तामें सात दिनोंतक स्नान करे तो वह मुनिके समान निर्मल हो जाता है ( अनु० २५ । ७ ) ।
  • पार्वतीजीने जिन नदियोंसे सलाह लेकर भगवान् शङ्करके प्रति धर्मका वर्णन किया था, उनमें वितस्ता भी थी ( अनु० १७४ । १८ ) ।

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