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विदर्भ

  • (१) एक प्राचीन देश, जिसे सहदेवने अपनी दक्षिण-दिग्विजयके समय विदर्भदेशीय भोजकट नगरमें जाकर वहाँके राजा भीष्मकको परास्त किया था ( सभा० ३१ । ११-१२ ) ।
  • यहाँके राजा भीष्मकको महर्षि दमनकी कृपासे दम, दान्त और दमन नामक पुत्र तथा दमयन्ती नाम्नी कन्याकी प्राप्ति हुई थी ( वन० ५३ । ५-७ ) ।
  • (२) विदर्भराजकी कन्या दमयन्तीके स्वयंवरका समाचार सुन-कर उसमें सम्मिलित होनेके लिये इन्द्र, अग्नि, वरुण और यम—ये चार देवता अपने सेवकों और वाहनके साथ विदर्भ देशमें पधारे ( वन० ५४ । २०-२६ ) ।
  • विदर्भ देशमें उत्पन्न होनेके कारण ही दमयन्ती वैदर्भी कहलाती थी ( वन० ५३ । १२, २२; वन० ५६ । ५; वन० ६८ । १२ ) ।
  • नल-सारथि वार्ष्णेयने राजकुमार इन्द्रसेन तथा कुमारी इन्द्रसेनाको रथपर बिठाकर विदर्भ देशको प्रस्थान किया ( वन० ६० । २१-२२ ) ।
  • राजा नलका दमयन्तीको विदर्भका मार्ग बताना
  • ( वन० ६१ । २३ ) ।
  • दमयन्तीके पिता विदर्भराज भीम महारथी, पृथ्वीपालक तथा चारों वर्णोंके देशकी जनताका अच्छी तरह पालन करते थे ( वन० ६४ । ४४—४७ ) ।
  • दमयन्ती अपनी मौसीसे विदा ले चेदिदेशसे विदर्भ देशमें अपने पिताके यहाँ जा पहुँची ( वन० ६१ । २१—२४ ) ।
  • राजा ऋतुपर्ण बाहुकरूपधारी नलके साथ विदर्भ देशको गये ( वन० ७१ । २; वन० ७२ । १९, ४२; वन० ७३ । १ ) ।
  • नलके प्रकट होनेपर विदर्भ देशमें महान् उत्सव मनाया गया ( वन० ७७ । ५—८ ) ।
  • रुक्मिणी विदर्भनरेशकी पुत्री थी, भगवान् श्रीकृष्णने उनका अपहरण किया । बहिनका वह अपहरण रुक्मीके लिये असह्य हो उठा; उसने यह प्रतिज्ञा कर ली कि कृष्णको मारे बिना विदर्भ देशकी राजधानीमें नहीं लौटूंगा; परंतु श्रीकृष्णका सामना होनेपर वह विशाल चतुरङ्गिणी सेनासहित पराजित हो गया । अतः अपनी प्रतिज्ञाकी रक्षा करता हुआ वह पुनः कुण्डिनपुरकी ओर नहीं लौटा । वहाँ उसकी पराजय हुई; वहीं भोजकट नामक श्रेष्ठ नगर बसाकर उसीमें रहने लगा । उन दिनों भोजकट ही विदर्भकी राजधानीके रूपमें प्रख्यात हुआ ( उद्योग० १५८ । १०—१६ ) ।
  • ( २ ) एक प्राचीन राजा, जिनके पुत्र राजा निमि अगस्त्य मुनिको अपनी कन्या और राज्यका दान करके पुत्र, पशु और बान्धवोंसहित स्वर्गमें चले गये ( अनु० १३७ । ११ ) ।

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