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विदेह

  • (१) राजा निमि, जो देह गिर जाने या देहाभिमानसे रहित होनेके कारण 'विदेह' कहलाते थे, इनके वंशमें होनेवाले सभी राजा विदेह कहलाये । इन्हींके नामपर मिथिलाको 'विदेह' कहा जाता है । राजा पाण्डुने अपनी दिग्विजय-यात्राके समय मिथिलापर चढ़ाई की और विदेहवंशी क्षत्रियोंको युद्धमें परास्त किया ( आदि० ११२ । २८ ) ।
  • इस वंशमें हयग्रीव नामक कुलाङ्गार राजा उत्पन्न हुआ था ( उद्योग० ७४ । १५-१७ ) ।
  • (२) पूर्वोत्तर भारतका एक जनपद ( मिथिला ), जहाँ विदेहवंशी क्षत्रियोंका राज्य था । भीमसेनने पूर्व-दिग्विजयके समय इस देशको जीता था ( सभा० २९ ।
  • ४-५ ) ।
  • परशुरामजीके आश्रमका द्वार विदेह देशसे उत्तर था ( वन० १३० । १३ ) ।
  • सीता विदेहराज जनककी पुत्री थीं ( वन० २०४ । १९ ) ।
  • इस देशके सैनिकोंनें अर्जुनपर आक्रमण किया था ( भीष्म० ११७ । ३२—३४ ) ।
  • कर्णने इस देशके क्षत्रिय वीरोंको परास्त किया था ( द्रोण० ४ । ६ ) ।
  • परशुरामजीने इस देशके क्षत्रियोंका अपने तीखे बाणोंद्वारा संहार किया था ( द्रोण० ७० । ११—१३ ) ।
  • कर्णने विदेहोंका महान् संहार किया था ( कर्ण० ३ । १९ ) ।
  • कर्णने विदेह देशको जीतकर इसे 'कर' देनेवाला बना दिया ( कर्ण० ८ । १८—२०; कर्ण० ११ । ३३ ) ।
  • विदेह देशके राजा जनकने महर्षि पञ्चशिखसे जरा और मृत्युको लाँघने का उपाय पूछा और उन्होंने इनको उपदेश दिया ( शान्ति० २१९ अध्याय ) ।
  • शुकदेवजीने विदेहराज जनकसे प्रवृत्ति-निवृत्ति धर्मके विषयमें प्रश्न किया और उन्होंने इसका उत्तर दिया ( शान्ति० २२६ । १०—११ ) ।
  • विदेहराज जनककी पुत्रीने एक श्लोकका गान इस प्रकार किया है—'स्त्रीके लिये कोई यश आदि कर्म, श्राद्ध एवं उपवास करना आवश्यक नहीं है, उसका धर्म है अपने पतिकी सेवा । उससे स्त्रियाँ स्वर्गलोकपर विजय पा लेती हैं' ( अनु० ४६ । १२—१३ ) ।

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