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विन्द

  • (१) धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० ६७ । ९४; आदि० ११६ । ३ ) ।
  • इसका भीमसेनके साथ युद्ध और उनके द्वारा वध ( द्रोण० १२७ । ३४—४५ ) ।
  • (२) अवन्तीका राजकुमार, जो अनुविन्दका भाई था । दक्षिण-दिग्विजयके अवसरपर सहदेवने इसे परास्त किया था ( सभा० ३१ । १० ) ।
  • इसका एक अक्षौहिणी सेना लेकर दुर्योधनको सहायताके लिये आना ( उद्योग० १९ । २४—२५ ) ।
  • भीमद्वारा इसकी श्रेष्ठ रथियोंमें गणना ( उद्योग० १६६ । ६ ) ।
  • दुर्योधनकी सेनाके दस प्रधान अधिनाथोंमेंसे एक यह भी था ( भीष्म० १६ । १७—१७ ) ।
  • यह मगदत्तके समान तेजस्वी था और हाथीकी पीठपर बैठकर केतुमान्के पीछे चल रहा था ( भीष्म० १० । ३० ) ।
  • प्रथम दिनके युद्धमें कुन्तिभोजके साथ इसका द्वन्द्व-युद्ध ( भीष्म० ४५ । ७२—७६ ) ।
  • विराटकुमार श्वेतके चंगुलमें फँस हुए मद्रराज शल्यकी इसने सहायता का ( भीष्म० ४७ । ४८—४९ ) ।
  • अर्जुन भाई अनुविन्दके साथ इसका इरावान् पर आक्रमण करना ( भीष्म० ८१ । २७ ) ।
  • इसका इरावान्के साथ युद्ध तथा उनके द्वारा पराजित होना ( भीष्म० ८३ । १९—२२ ) ।
  • इसका धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरके साथ युद्ध ( भीष्म० ८३ । ३३—३६ ) ।
  • भीमसेन और अर्जुनके साथ युद्ध ( भीष्म० अध्याय ११३ से ११७ तक ) ।
  • विराटके साथ युद्ध ( द्रोण० १० । २०—२१ ) ।
  • भीमसेनके साथ युद्ध ( द्रोण० १५ । ३५—३६ ) ।
  • विराटपर इसका धावा ( द्रोण० १५ । ४३ ) ।
  • विराटके साथ युद्ध ( द्रोण० १६ । ४—६ ) ।
  • अर्जुनके साथ युद्ध और उनके द्वारा इसका वध ( द्रोण० २९ । १०—२५ ) ।
  • इसके मारे जानेकी चर्चा ( कर्ण० ५५ । ५३ ) ।
  • (३) एक केकेय-राजकुमार, जो कौरवपक्षका योद्धा था । इसका गांधारिकके साथ युद्ध और उनके द्वारा वध ( कर्ण० १३ । ३४—३५ ) ।

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