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विवस्वान्

  • ( १ ) बारह आदित्योंमेंसे एक लोकधर सूर्य ( आदि० ६५ । १५ ) ।
  • ये कश्यपके द्वारा अदितिके गर्भसे उत्पन्न हुए हैं ( आदि० ७५ । १२ ) ।
  • वैवस्वत यमके पिता हैं ( आदि० ७५ । १२ ) ।
  • विवस्वान्के पुत्र मनु हैं ( आदि० ७५ । १७ ) ।
  • ये कर्णके पिता हैं ( आदि० ११७ । १०—२० ) ।
  • इनकी पुत्रीका नाम तपती था ( आदि० १७१ । १ ) ।
  • इनके एक सौ आठ नामोंका वर्णन ( वन० ३ । १६—२८ ) ।
  • इन्होंने पृथ्वीपर निवास करके अपने समस्त शत्रुओंको दग्ध कर दिया था ( वन० ३५५ । १९ ) ।
  • इन्होंने वेदोक्त विधिके अनुसार यज्ञ करके आचार्य कश्यपको दक्षिणारूपमें एक दिशाका दान कर दिया था, इसीलिये उसे दक्षिण दिशा कहते हैं ( उद्योग० १०९ । १ ) ।
  • भगवान् श्रीहरिने इन्हें पूर्वकालमें अविनाशी कर्मयोगका उपदेश दिया था । फिर इन्होंने अपने पुत्र वैवस्वत मनुको इसकी शिक्षा दी ( भीष्म० २८ । १ ) ।
  • ये ब्रह्माके प्रजापतियोंमेंसे एक हैं ( शान्ति० ३३४ । ३६ ) ।
  • इन्होंने अदितिके सविलाससे भी बड़े पुत्रसे नारायणके मुखसे प्रकट हुए साश्वत धर्मका उपदेश ग्रहण किया और त्रेतायुगके आरम्भमें वैवस्वत मनुको इसकी शिक्षा दी ( शान्ति० ३४८ । ५०—५१ ) ।
  • नासत्य और दस— ये दोनों अश्विनीकुमार इनके औरस पुत्र हैं और अश्विरूपधारिणी इनकी पत्नी संज्ञादेवीकी नाकसे प्रकट हुए हैं ( अनु० १५० । १८—१८ ) ।
  • ( २ ) एक दैत्य, जिसका गरुड़द्वारा वध हुआ ( उद्योग० १०५ । ६२ ) ।
  • ( ३ ) एक सनातन विश्वेदेव ( अनु० ९१ । ३२ ) ।

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