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वृद्धक्षत्र

  • (१) ये सिन्धुराज जयद्रथके पिता थे ( वन० २६४ । ६ ) ।
  • जयद्रथके जन्म-समयमें आकाशवाणीद्वारा उसकी मृत्युका समाचार सुनकर इनका चिन्तित होना और अपने जाति-भाइयोंको बुलाकर उनके सामने मेरे पुत्रका सिर जो पृथ्वीपर गिरादेगा, उसके मस्तकके सैकड़ों टुकड़े हो जायँगे' यों जयद्रथको वरदान देना । पुनः अपने पुत्रको राजसिंहासनपर बैठाकर स्वयं तपके लिये प्रस्थान करना ( द्रोण० १४६ । १८—१९ ) ।
  • अर्जुनके बाणद्वारा जयद्रथके मस्तकका इनकी गोदमें गिरना और मस्तकका इनकी गोदसे पृथ्वीपर गिरनेसे इनकी मृत्यु ( द्रोण० १४६ । १२२—१३० ) ।
  • (२) एक पूरुवंशी राजा, जो पाण्डवपक्षका योद्धा था । इसका अश्वत्थामाके साथ युद्ध और उसके द्वारा वध ( द्रोण० २०० । ७३—७४ ) ।

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