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वृषपर्वा

  • (१) एक दानव, जो कश्यपद्वारा दनुके गर्भसे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६५ । २४ ) ।
  • यह दीर्घप्रज्ञ नामक राजाके रूपमें पृथ्वीपर उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । १५-१६ ) ।
  • दैत्योंके पुरोहित शुक्राचार्य इसीके नगरमें रहते थे ( आदि० ७८ । १३-१४ ) ।
  • इसकी कन्याका नाम शर्मिष्ठा था ( आदि० ७८ । ६ ) ।
  • शुक्राचार्यसे अपने नगरमें रहनेके लिये इसकी करुण प्रार्थना ( आदि० ८० । ७-८ ) ।
  • इसके प्रति इसकी पुत्री शर्मिष्ठाको आजीवन अपनी दासी बनानेके लिये देवयानीका अनुरोध ( आदि० ८० । १६ ) ।
  • शर्मिष्ठाको बुलानेके लिये इसका धात्रीको भेजना ( आदि० ८० । १७ के बाद, द० पाठ ) ।
  • (२) एक प्राचीन राजर्षि, जिनके आश्रमपर जानेके लिये आकाशवाणीद्वारा पाण्डवोंको आदेश मिला था ( वन० १९६ । १५ ) ।
  • इनके द्वारा पाण्डवोंका स्वागत ( वन० १९८ । २०-२३ ) ।
  • इनका पाण्डवोंको उपदेश देना ( वन० १९८ । २४-२७ ) ।
  • पाण्डवोंके प्रस्थान करते समय इन्होंने उन्हें ब्राह्मणोंको सौंप दिया और स्वयं पाण्डवोंको आशीर्वाद दे मार्ग बताकर लौट आये ( वन० १९८ । २८-२९ ) ।
  • पाण्डवोंका पुनः लौटकर वृषपर्वाके आश्रमपर आना और सत्कृत होना ( वन० १९७ । ६-८ ) ।

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