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वृषसेन

  • (१) एक प्राचीन राजा, जो यम-सभामें रहकर वैवस्वत यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १३ ) ।
  • (२) युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञमें आया हुआ एक अभिमानी नरेश ( सभा० ४४ । २१-२२ ) ।
  • (३) कर्णका एक पुत्र, जो दुर्योधनकी सेनाका एक श्रेष्ठ रथी था ( उद्योग० १६० । २२ ) ।
  • शतानीक आदि द्रौपदीपुत्रोंके साथ इसका युद्ध ( द्रोण० १६ । ९-१० ) ।
  • इसका पाण्डवोंके साथ युद्ध ( द्रोण० २५ । ५० ) ।
  • अभिमन्युद्वारा इसका पराजित होना ( द्रोण० ४४ । ५-७ ) ।
  • इसके ध्वजका वर्णन ( द्रोण० १०५ । १६-१८ ) ।
  • अर्जुनके साथ इसका युद्ध ( द्रोण० १४५ । ४२-५६ ) ।
  • द्रुपदके साथ इसका संग्राम ( द्रोण० १६५ । १३ ) ।
  • इसके द्वारा द्रुपदकी पराजय ( द्रोण० १६८ । १९-२६ ) ।
  • सात्यकिद्वारा इसकी पराजय ( द्रोण० १७० । ३०-३१ ) ।
  • द्रोणाचार्यके मारे जानेपर इसका युद्धस्थलसे भागना ( द्रोण० १९३ । १६ ) ।
  • सात्यकिद्वारा इसकी पराजय ( द्रोण० २०० । ५१-५३ ) ; कर्ण० ४८ । ४३-४५ ) ।
  • इसका नकुलके साथ युद्ध ( कर्ण० ६१ । ३६-३९ ) ।
  • शतानीकके साथ इसकी मुठभेड़ ( कर्ण० ७५ । ९-१० ) ।
  • इसका नकुलके साथ घोर संग्राम और इसके द्वारा नकुलकी पराजय ( कर्ण० ८४ । १९-३५ ) ।
  • अर्जुनके साथ इसका युद्ध और उनके द्वारा वध ( कर्ण० ८५ । ३५-३८ ) ।
  • व्यासजीके आवाहन करनेपर गङ्गाजलसे निकलनेवाले वीरोंमें यह भी था ( आश्रम० ३३ । १० ) ।

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