← अनुक्रमणिका

वैत्रिक

  • एक भारतीय जनपद । दुर्योधनने यहाँके सैनिकोंको भीष्मकी रक्षाके लिये भेजा था ( भीष्म० ५१ । ७ ) ।
  • (१) ये आयौदौम्य मुनिके एक शिष्य थे ( आदि० ३ । ७८ ) ।
  • इनकी गुरुभक्तिका वर्णन ( आदि० ३ । ७९ ) ।
  • इनको गुरुका आशीर्वाद प्राप्त होना ( आदि० ३ । ८० ) ।
  • इनके गार्हस्थ्यधर्मका वर्णन ( आदि० ३ । ८१ ) ।
  • इनका जनमेजयका उपाध्याय होना ( आदि० ३ । ८२ ) ।
  • परदेश जाते समय अपने शिष्य उत्तङ्कको घरकी सँभाल रखनेके लिये इनका आदेश ( आदि० ३ । ८४ ) ।
  • इनका परदेशसे लौटनेपर उत्तङ्कके कार्य-विधानपर प्रसन्न होना और उन्हें आशीर्वाद देकर घर जानेके लिये आज्ञा देना ( आदि० ३ । ८८-८९ ) ।
  • गुरु-दक्षिणाके लिये उत्तङ्कके आग्रह करनेपर उन्हें गुरुपत्नीके पास गुरुदक्षिणाकी वस्तु पूछनेके लिये भेजना ( आदि० ३ । ९०-९४ ) ।
  • (२) भारतीय आर्योंके सर्वप्रथम और सर्वमान्य धार्मिक ग्रन्थ, जो अप्रतिम ज्ञानके भंडार हैं । इनकी संख्या चार है—ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद । ये सभी मूर्तिमान् हो ब्रह्माजीकी सभामें उपस्थित रहते हैं ( सभा० ११ । ३२ ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in