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शतद्रु ( शतद्रू )

  • हिमालय पर्वतसे निकली हुई एक नदी, जिसका आधुनिक नाम सतलज है । एक समय पुत्रोंके शोकसे व्याकुल होकर वासिष्ठजी आत्महत्याके
  • लिये इन नदीमें कूद पड़े थे, उस समय उन्हें अग्निके समान तेजस्वी ज्ञान यह नदी सैकड़ों धाराओंमें फूटकर इश्वर-उत्तर भाग चली । शतधा विद्युत होनेसे इसका नाम 'शतद्रु' हुआ ( आदि० १७० । ६-९ ) ।
  • यह वरुणकी सभामें रहकर उनकी उपासना करती है ( सभा० ७ । १५ ) ।
  • यह भारतकी एक प्रमुख नदी है; इसका जल भारतवासी पीते हैं ( भीष्म० ९ । १५ ) ।
  • महादेवजीके षोडशोपचारका वर्णन करते समय पार्वती-जीने इसके विषयमें जिन पुण्यमयी प्रमुख नदियोंसे सलाह ली थी, उनमें शतद्रु भी थी ( अनु० १६५ । १८ ) ।
  • यह प्रायः प्रातःस्नानीय नदी है ( अनु० १६५ । १८ ) ।

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