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शतानीक

  • (१) नकुलद्वारा द्रौपदीके गर्भसे उत्पन्न ( आदि० ६३ । १२३; आदि० ७५ । ७५ ) ।
  • यह विश्वेदेवके अंशसे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । १२७-१२८ ) ।
  • कौरवकुलके महामना राजर्षि शतानिकके नामपर नकुलने अपने इस पुत्रका नाम ( शतानिक ) रखा था ( आदि० २२० । ८४ ) ।
  • इसके द्वारा जयत्सेनकी पराजय ( भीष्म० ७३ । ४२-४५ ) ।
  • दुष्कर्णकी पराजय ( भीष्म० ७३ । ४६-५२ ) ।
  • इसका वृषसेन के साथ युद्ध ( द्रोण० १६ । ७-८ ) ।
  • इसके घोड़ोंका वर्णन ( द्रोण० २३ । ३० ) ।
  • इसके द्वारा भूतकर्माका वध ( द्रोण० २५ । १३२ ) ।
  • चित्रसेनकी पराजय ( द्रोण० १५८ । १२ ) ।
  • धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माके साथ इसका घोर युद्ध ( कर्ण० २५ । १३-१६ ) ।
  • अश्वत्थामाके साथ इसका युद्ध ( कर्ण० ३५ । १४-१७ ) ।
  • इसके द्वारा कलिङ्गराजकुमारका वध ( कर्ण० ८५ । २१ ) ।
  • अश्वत्थामाद्वारा इसका वध ( सौप्तिक० ८ । ५०-५८ ) ।
  • (२) परीक्षित्पुत्र जनमेजयकी पत्नी वपुष्टमाके गर्भसे उत्पन्न राजकुमार । इसकी पत्नी विदेहरा राजकुमारी थी और इसके पुत्रका नाम था अश्वमेधदत्त ( आदि० ९५ । ८६ ) ।
  • (३) कुरुकुलके एक प्राचीन राजर्षि, जिनके नामपर नकुलने अपने पुत्रका नाम रखा था ( वन० २२० । ८४ ) ।
  • (४) ( सूर्यदत्त ) मत्स्यनरेश विराटके भाई और सेनापति, जिन्होंने गोहरणके समय सोनेका कवच धारण करके त्रिगर्तोंके साथ युद्धके लिये प्रस्थान किया ( विराट० ३१ । ११-१२ ) ।
  • इनका दूसरा नाम सूर्यदत्त था ( विराट० ३१ । १२ ) ।
  • त्रिगर्तोंके साथ इनका घोर संग्राम ( विराट० ३३ । ११-२१ ) ।
  • इन्हें भीष्मने घायल किया था ( भीष्म० ११८ । २७ ) ।
  • भीष्मके ये प्रमुख सहायक थे ( द्रोण० १५८ । ४१ ) ।
  • द्रोणाचार्यद्वारा इनका वध ( द्रोण० १६० । ३० ) ।
  • (५) विराटका छोटा भाई । द्रोणाचार्यद्वारा इसका वध ( द्रोण० २१ । २८ ) ।

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