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शनैश्वर

  • एक ग्रह, जो ब्रह्माजीकी सभामें रहकर उनकी उपासना करते हैं ( सभा० ११ । २९ ) ।
  • ये महातेजस्वी और तीक्ष्ण स्वभाववाले ग्रह हैं । ये जब रोहिणी नक्षत्रको पीड़ित करते हैं, तब जगत्के लिये पीड़ादायक होते हैं ( उद्योग० १४३ । ८ ) ।
  • ऐसा योग अनिष्ट संहारके लिये महान् भयकी प्राप्ति सूचित होता है ( भीष्म० २ । १२ ) ।
  • ये भावी युगमें मनुके पदपर प्रतिष्ठित होनेवाले हैं ( शान्ति० ३४९ । ५५ ) ।
  • नित्य सारणीय देवताओंमें शनैश्वर ग्रहका भी नाम है ( अनु० १५० । १७ ) ।
  • एक म्लेच्छ जाति, जो वसिष्ठमुनिकी नन्दिनी नामक गायके गोबर और मूत्रसे उत्पन्न हुई थी ( आदि० १७७ । २६-३० ) ।
  • शबर दक्षिण भारतका एक जनपद है ( भीष्म० ५० । ५३ ) ।
  • मान्धाताने कौरवसेनाका संहार करते समय सहस्रों शबरोंकी लाठीसे धरतीको पाट दिया था ( द्रोण० ११६ । ४६ ) ।
  • वसिष्ठमुनिकी आज्ञासे नन्दिनिने शबरोंकी सृष्टि की ( शल्य० ४० । २१ ) ।
  • ये मान्धाताके राज्यमें निवास करते थे और चोरी-डकैतीसे जीविका चलाते थे ( शान्ति० ६५ । १३-१५ ) ।
  • दक्षिण भारतमें जन्म लेनेवाले शबर आदि म्लेच्छ माने गये हैं ( शान्ति० २०७ । ४२ ) ।
  • भगवान् शंकर किरातों और शबरोंका भी रूप ग्रहण कर लेते हैं ( अनु० १४ । १४१-१४२ ) ।
  • शबर पहले क्षत्रिय थे, परंतु ब्राह्मणोंके अमर्षसे शूद्रत्वको प्राप्त हो गये ( अनु० ३५ । १७-१८ ) ।
  • बहुत-से क्षत्रिय परशुरामजीके भयसे गुफाओंमें छिपे रहकर स्वधर्मको भी छोड़ बैठे । ब्राह्मणोंका उन्हें दर्शन नहीं हुआ, जिससे वे पुनः अपने धर्मको न जान सके और शबर आदि के सहवाससे वैसे ही बन गये ( आश्रम० २९ । १५-१६ ) ।
  • कश्यपद्वारा कद्रूके गर्भसे उत्पन्न एक नाग ( आदि० ३५ । १० ) ।

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