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शामिक

  • (१) एक ऋषि, जो गौओंके रहनेके स्थानमें बैठते थे और गौओंका दूध पीते समय बछड़ोंके मुखसे जो फेन निकलता था, उसीको खा-पीकर तपस्या करते थे । ये मौनव्रतका पालन करनेवाले थे । इनके पास भूखे-प्यासे परीक्षित्का आगमन और उनके द्वारा इनके कंधेपर मरे हुए सर्पके रखे जानेका वृत्तान्त ( आदि० ४० । १७-२१ ) ।
  • इनका पुत्रका नाम 'शृङ्गी' ऋषि था ( आदि० ४० । २५ ) ।
  • इनका अपने पुत्रको फटकारना और राजाकी महत्ता एवं आवश्यकता बतलाना ( आदि० ४१ । १०-१३ ) ।
  • क्रोधकी निन्दा एवं क्षमाकी प्रशंसा करते हुए इनका अपने पुत्रको संयममें रहकर क्रोधको मिटानेके लिये आदेश देना ( आदि० ४२ । ३—१२ ) ।
  • इनका गौरमुख नामक शीलवान् शिष्यकी संदेश देकर राजा परीक्षित्के पास भेजना ( आदि०
  • ४२ । १३-१४ ) ।
  • दे इन्द्रकी उपासना करते हैं ( सभा० ९ । १६ ) ।
  • व्यासजीने जनमेजयको स्वर्गीय राजा परीक्षित् पुत्रसहित शमीक मुनिको भी ( आश्व० २५ । ८ ) ।
  • ( २ ) वृष्णि-वंशी वीर, जो द्रौपदीके स्वयंवरमें गया था ( आदि० १८४ । १९ ) ।
  • यह द्वारकाके सात महारथियोंमेंसे एक था ( सभा० १५ । ५८ ) ।
  • इसका एक पराक्रमसे अंकित होना ( द्रोण० ११५ । ५८ ) ।

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