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शल

  • (१) वासुकि-वंशमें उत्पन्न एक नाग, जो जनमेजयके सर्पयज्ञमें दग्ध हो गया था ( आदि० ५७ । ५ ) ।
  • (२) धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० ११६ । ४ ) ।
  • इसका भीमसेनपर आक्रमण करना ( द्रोण० १२७ । ३४; कर्ण० ५१ । ८-९ ) ।
  • इसका भीमसेनके साथ युद्ध और उनके द्वारा वध ( कर्ण० ८४ । ३—६ ) ।
  • (३) कुरुवंशी राजा सोमदत्तके पुत्र और भूरिश्रवाके भ्राता, जो द्रौपदीके स्वयंवरमें गये थे ( आदि० १८४ । १५ ) ।
  • ये युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञमें गये थे ( सभा० ३४ । ८ ) ।
  • दुर्योधनकी सेनाके एक विशिष्ट योद्धा थे ( उद्योग० ५५ । ६३ ) ।
  • भीष्मद्वारा निर्मित महान् व्यूहमें वाम भागमें स्थित हो ये सारी सेनाकी रक्षा करते हुए बढ़ रहे थे ( भीष्म० ५५ । ५० ) ।
  • इन्होंने अभिमन्युपर धावा किया था ( द्रोण० ३० । ५—२४ ) ।
  • इनके ध्वजका वर्णन ( द्रोण० १०५ । २४—२५ ) ।
  • द्रौपदीकुमारोंके साथ इनका युद्ध ( द्रोण० १०६ । १५ ) ।
  • श्रुतकर्माद्वारा इनका वध ( द्रोण० १०८ । १० ) ।
  • व्यासजीके आवाहन करनेपर मरे हुए अन्य कौरव वीरोंके साथ ये भीष्मके पास आये थे ( आश्रम० ३२ । १० ) ।
  • मृत्युके पश्चात् विश्वदेवोंमें मिल गये ( स्वर्ग० ५ । १६-१८ ) ।
  • (४) इक्ष्वाकुवंशी राजा प्रतिविन्ध्यके पुत्र; इनकी माता मण्डूकराजकी कन्या सुशोभना थी । इनके दो भाई और थे, जिनका नाम था दल और बल । पिताद्वारा इनका राज्याभिषेक ( वन० १२२ । ३६ ) ।
  • इनका महर्षि वामदेवसे वाम्य अश्वोंकी याचना करना और पुनः लौटा देनेके शर्तपर इन्हें उन अश्वोंकी प्राप्ति ( वन० १२२ । ४३ ) ।
  • अश्वोंको लौटानेके विषयमें इनका महर्षि वामदेवसे संवाद ( वन० १२२ । ४८-५१ ) ।
  • अश्वोंके न लौटानेपर महर्षि वामदेवद्वारा उत्पन्न किये गये राक्षसोंके प्रहारसे इनका वध ( वन० १२७ । ५०-५१ ) ।

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