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शालिहोत्र

  • शालिहोत्र—एक मुनि, जिनके आश्रममें व्यासजी ठहरे थे। इनके आश्रमके पास एक सरोवर तथा पवित्र वृक्ष था। वह वृक्ष सर्दी, गर्मी तथा वर्षाको अच्छी तरह सहनेवाला था। वहाँ केवल जल पी लेनेसे भूख-प्यास दूर हो जाती थी। उस सरोवर और वृक्षका निर्माण शालिहोत्र मुनिने अपनी तपस्याद्वारा किया था ( आदि० १५५ । १५ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ५६३ ) ।
  • इनके आश्रममें हिडिम्बाके साथ पाण्डवोंका आगमन । इनके द्वारा भूखसे पीड़ित हुए पाण्डवोंको भोजन-दान ( आदि० १५४ । १८ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ५६४ ) ।
  • ये अश्वविद्याके आचार्य थे और घोड़ोंकी जाति तथा उनके विषयकी तात्त्विक बातें जानते थे ( वन० ७१ । २७ ) ।
  • इनका शालि सूर्य नामसे प्रसिद्ध एक तीर्थ है, जहाँ स्नान करनेसे सहस्र गोदानका फल मिलता है ( वन० ८३ । १०० ) ।

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