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शिशुपाल

  • चेदिदेशका एक प्रसिद्ध राजा, जिसके रूपमें हिरण्यकशिपु दैत्य ही इस भूतलपर उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । ५ ) ।
  • द्रौपदीके स्वयंवरमें इसका आगमन ( आदि० १८५ । २३ ) ।
  • यह दमघोषका पुत्र था । द्रौपदीके स्वयंवरमें धनुषपर हाथ लगाते ही यह घुटनोंके बल पृथ्वीपर गिर पड़ा था ( आदि० १८६ । २५ ) ।
  • यह कलिङ्गराजकी कन्याके स्वयंवरमें भी गया था ( शान्ति० ४ । ६ ) ।
  • युधिष्ठिरके मयनिर्मित सभाभवनमें यह भी विराजमान होता था ( सभा० ४ । २९ ) ।
  • यह जरासंधका आश्रय लेकर उसका प्रधान सेनापति हो गया था ( सभा० १७ । १०–११ ) ।
  • भीमसेन अपनी दिग्विजययात्रा में इसके द्वारा सम्मानित हुए थे ( सभा० २९ । ११-१२ ) ।
  • यह युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञमें आया था ( सभा० ३४ । १४ ) ।
  • राजसूय यज्ञमें अग्रपूजाके समय श्रीकृष्णके प्रति इसके आक्षेपपूर्ण वचन ( सभा० ३७ अध्याय ) ।
  • युधिष्ठिरका इसे समझाना और भीष्मका इसके आक्षेपोंका उत्तर देना ( सभा० ३८ । १-२१ ) ।
  • श्रीकृष्णकी अग्रपूजाके कारण राजसूय यज्ञमें उपद्रव मचानेके लिये इसका प्रयत्न ( सभा० ३९ । ११-१२ ) ।
  • इसके द्वारा भीष्मकी निन्दा ( सभा० ३९ अध्याय ) ।
  • इसकी बातोंसे भीमसेनका कुपित होना ( सभा० ४२ । १-१२ ) ।
  • भीष्मजीके द्वारा इसके जन्मकालिक वृत्तान्तका वर्णन । इसके जन्म-मरणकी आकाशवाणी, इसकी मृत्युके निमित्तका उद्योग तथा श्रीकृष्णकी गोदमें अनेर इसकी दो भुजाओं तथा एक आँखका विलीन होना आदि ( सभा० ४३ अध्याय ) ।
  • इसका भीष्मको फटकारना ( सभा० ४४ । १-१२ ) ।
  • श्रीकृष्णकी अनुपस्थितिमें इसके द्वारा द्वारकाका दाह ( सभा० ४५ । ७ ) ।
  • इसके द्वारा वसुदेवजीके यज्ञीय अश्वका अपहरण ( सभा० ४५ । ९ ) ।
  • इसकी ध्रुवाकी पत्नीका हरण करना ( सभा० ४५ । १० ) ।
  • विशाला-नरेश ( अने मामा ) की पुत्रीका अपहरण ( सभा० ४५ । ११ ) ।
  • इसके द्वारा शिरश्छेदन ( वध ) ( सभा० ४५ । २५ ) ।
  • परमात्मा श्रीकृष्णमें इसके तेजका समावेश ( सभा० ४५ । २६-२७ ) ।
  • श्रीकृष्णका अर्जुनके प्रति इसके वधका कारण बताना ( द्रोण० १८१ । २१-२२ ) ।

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