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शूरसेन (शूर)

  • (१) वसुदेवजीके पिता । यदुवंशके एक श्रेष्ठ पुरुष । इनकी पुत्रीका नाम था पृथा (आदि० ६७ । १२१; आदि० १०९ । १)।
  • इसके द्वारा अपनी पुत्री पृथाका अपने मित्र राजा कुन्तिभोजको गोद देना ( आदि० १०९ । २; आदि० १०९ । २; आदि० १०९ । ३ ) ।
  • ये यदुवंशी देवमीढके पुत्र थे। इनके पुत्रका नाम वसुदेव हुआ ( द्रोण० १४४ । ६-७ ) ।
  • कहीं-कहीं इन्हें चित्ररथका पुत्र कहा गया है। सम्भव है, देवमीढका ही दूसरा नाम 'चित्ररथ' हो ( अनु० १४७ । १९-२२ ) ।
  • (२) एक जनपद और वहाँके निवासी ( आधुनिक मथुरा मण्डल या ब्रज मण्डल ) । इस देशके लोग जरासंधके भयसे अपने भाइयों और सेवकोंके साथ दक्षिण दिशामें भाग गये ( सभा० १३ । २४-२६ ) ।
  • सहदेवने दक्षिण दिग्विजयके समय इन्द्रप्रस्थसे चलकर सब पहले शूरसेननिवासियोंपर ही पूर्णरूपसे विजय पायी थी ( सभा० ३१ । १३ ) ।
  • इस देशके लोग राजसूय यज्ञमें युधिष्ठिरके लिये भेंट लाये थे ( सभा० ५२ । १३ ) ।
  • पाण्डवलोग पञ्चालसे दक्षिण यदुत्तम तथा शूरसेन देशके बीचसे होकर मत्स्य देशको गये थे ( विराट० १ । ४ ) ।
  • यह एक भारतीय जनपद है ( भीष्म० ९ । २९; ५२ ) ।
  • इस देशके शूरवीर सैनिक अपना शरीर निछावर करनेको उद्यत हो विशाल रथसमुदायके द्वारा पितामह भीष्मकी रक्षा करते थे ( भीष्म० ९८ । १२-१४ ) ।
  • इस देशके सैनिकोंको कृतवर्मा और काम्बोज-नरेशके साथ आकर अर्जुनको आगे बढ़नेसे रोका था ( द्रोण० ११ । ३०-३८ ) ।
  • शूरसेनदेशीय योद्धाओने अर्जुनपर बाणोंकी वर्षा की थी ( द्रोण० १३ । २ ) ।
  • सात्यकिको आगे बढ़नेसे रोका था ( द्रोण० १४५ । ९ ) ।
  • युधिष्ठिरने शूरसेनोंका संहार करके मृतदल रथोंकी काँच मचा दी ( द्रोण० १६१ । २९ ) ।
  • भीमसेनने शूरसेन देशके रणदुर्मद क्षत्रियोंको काट-काटकर वहाँकी रणभूमि को पाट दिया, जिससे वहाँ खूनकी काँच मच गयी ( द्रोण० १६१ । ४०-४१ ) ।
  • शूरसेननिवासी यज्ञ करते हैं ( कर्ण० ४५ । २८ ) ।
  • पाण्डवपक्षके शूरसेनदेशीय वीरोंके साथ कृपाचार्य, कृतवर्मा और शकुनिने युद्ध किया था ( कर्ण० ४७ । १६-१८ ) ।
  • ( ३ ) एक राजा जो भीष्मनिर्मित क्रौञ्चव्यूहके ग्रीवाभागमें दुर्योधनके साथ खड़ा था ( भीष्म० ७५ । १६ ) ।

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