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शृङ्गी

  • कौरव्यकुलमें उत्पन्न एक नाग, जो जनमेजयके सर्पसत्रमें भस्म हो गया ( आदि० ५७ । १३ ) ।
  • शमीक ऋषिके तरुण पुत्र, जो महान् तपस्वी, दुःसह महान् व्रतधारी था । उसमें क्रोधकी मात्रा बहुत थी ( आदि० ४० । २५-२६ ) ।
  • आचार्यकी सेवासे लौटते समय अपने मित्र कृशके द्वारा राजा परीक्षित्के अपराधका समाचार सुनकर इनके द्वारा उन्हें तक्षकके डसनेसे मरनेका शाप ( आदि० ५० । २९ से ४४ तक; आदि० ५० । १४-११ ) ।
  • पिताद्वारा इसकी भर्त्सना तथा राजाकी महत्ता एवं आवश्यकताका प्रतिपादन ( आदि० ४१ । २०-२२ ) ।
  • व्यासजीके आवाहन करनेपर स्वर्गसे परीक्षित्के साथ शृङ्गी और इसके पिता शमीक भी जनमेजयके यज्ञमें आये थे ( आश्रम० ३५ । ८ ) ।

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