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श्रवण

  • (१) सत्ताईस नक्षत्रोंमेंसे एक । श्रवण नक्षत्र आनेपर जो मनुष्य वस्त्रवेष्टित कमल दान करता है, वह श्वेत विमानके द्वारा खुले हुए स्वर्गमें जाता है ( अनु० ६४ । २८ ) ।
  • श्रवण नक्षत्रमें श्राद्धका दान करनेवाला मानव मृत्युके पश्चात् सद्गतिको प्राप्त होता है ( अनु० ८९ । ११ ) ।
  • चन्द्रव्रत करनेवाले साधकको श्रवण-नक्षत्रमें चन्द्रमाके कानकी भावना करके उसकी पूजा करनी चाहिये ( अनु० ११० । ७ ) ।
  • (२) बारह महीनोंमेंसे एक । जिस मासकी पूर्णिमाको श्रवण नक्षत्रका योग होता है, उसे श्रावण कहते हैं । यह भाद्रपदके पहले आता है । जो मन संयममें रखकर श्रावण मासको प्रतिदिन एक समय भोजन करके बिताता है, वह विभिन्न तीर्थोंमें स्नान करनेके पुण्य-फलको पाता और अपने कुटुम्बीजनोंकी वृद्धि करता है ( अनु० १०६ । २७ ) ।
  • श्रावणमासकी द्वादशी तिथिको दिन-रात उपवास करके जो भगवान् श्रीधरकी आराधना करता है, वह पाँच महायज्ञोंका फल पाता है और विमानपर बैठकर सुख भोगता है ( अनु० १०६ । ११ ) ।

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