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श्रुतश्रवा

  • (१) एक ऋषि । इनके पुत्रका नाम सोमश्रवा था । सोमश्रवाको अपना पुरोहित बनानेके लिये जनमेजय-की इनसे प्रार्थना ( आदि० ३ । १३-१५ ) ।
  • इनका अपने पुत्रके जन्म-प्रसङ्ग तथा उदारतापूर्ण स्वभाव आदि-का वर्णन करते हुए उनकी प्रार्थना स्वीकार करना ( आदि० ३ । १६-१९ ) ।
  • ये जनमेजयके सर्पसत्रमें सदस्य बने थे ( आदि० ५३ । ९-१० ) ।
  • तपस्या करके सिद्धि प्राप्त करनेवाले ऋषियोंमें इनका भी नाम है ( शान्ति० २९२ । १६-१७ ) ।
  • (२) एक राजर्षि,
  • जो यम-सभा में रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १९ ) ।
  • ( २ ) चेदिराज दमघोषकी भार्या । श्रीकृष्णकी पितृष्वसा ( बुआ ) और शिशुपालकी माता । इनके द्वारा अपने पुत्रकी रक्षाके लिये श्रीकृष्णसे प्रार्थना ( सभा० ४३ । १९—२० ) ।
  • शिशुपालके सौ अपराध क्षमा कर दूँगा—ऐसा कहकर श्रीकृष्णद्वारा इनको आश्वासन ( सभा० ४३ । २४ ) ।
  • एक दैत्य, जिसका गरुड़द्वारा वध हुआ था ( उद्योग० १०५ । १२ ) ।

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