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श्रुतायु ( श्रुतायुध )

  • (१) कलिङ्ग देशके राजा, जो युधिष्ठिरकी सभामें विराजते थे ( सभा० ४ । २६ ) ।
  • इन्होंने राजसूय यज्ञमें युधिष्ठिरको मणि-रत्न भेंट किये थे ( सभा० ५१ । ७ के बाद दा० पाठ ) ।
  • ये द्रौपदीके स्वयंवरमें पधारे थे ( आदि० १८५ । १३ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इन्हें रणनिमन्त्रण भेजनेका निश्चय हुआ था ( उद्योग० ४ । २४ ) ।
  • ये कलिङ्गराज कौरवपक्षकी एक अक्षौहिणी सेनाके अधिनायक थे ( भीष्म० १६ । १६ ) ।
  • भीमसेनके साथ युद्ध और उनके द्वारा घायल होना ( भीष्म० ५७ । ७७—७५ ) ।
  • इनके दो चक्ररक्षक—सहदेव और सत्य—भीमसेनद्वारा मारे गये ( भीष्म० ५४ । ७६ ) ।
  • इनका अर्जुनके साथ युद्ध ( द्रोण० ९२ । ३६—४४ ) ।
  • ये पर्णाशाके गर्भसे वरुणद्वारा उत्पन्न हुए थे । इन्हें वरुणद्वारा गदाकी प्राप्ति हुई थी ( द्रोण० ९२ । ४५—५१ ) ।
  • इनका
  • अपनी ही गदाद्वारा वध ( द्रोण० ९२ । ५४ ) ।
  • (२) एक क्षत्रिय राजा, जो क्रोधवशसंज्ञक दैत्यके अंशसे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । ६४ ) ।
  • यह महारथी वीर था और द्रौपदीके स्वयंवरमें आया था ( आदि० १८५ । २१ ) ।
  • महाबली श्रुतायु युधिष्ठिरकी सभाका भी एक सदस्य था ( सभा० ४ । २८ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इसको रणनिमन्त्रण भेजनेका निश्चय किया गया था ( उद्योग० ४ । २३ ) ।
  • प्रथम दिनके संग्राममें इरावान्के साथ इसका युद्ध ( भीष्म० ५० । ५६—५९ ) ।
  • यह अम्बष्ठदेशका राजा था और भीष्मकी रक्षा करते हुए इसने अर्जुनका सामना किया था ( भीष्म० ५१ । ७५—७६ ) ।
  • यह भीष्म-निर्मित कौव्यूहके अग्रभागमें खड़ा था ( भीष्म० ७३ । २२ ) ।
  • यह युद्धमें युधिष्ठिरद्वारा पराजित हुआ था ( द्रोण० ८४ । १—१७ ) ।
  • इसका अर्जुनपर आक्रमण और उनके द्वारा वध ( द्रोण० ९३ । ६०—६३ ) ।
  • (३) एक कौरवपक्षीय योद्धा, जो अच्युतायुका भाई था । इसने अपने भाई अच्युतायुके साथ रहकर कौरव सेनाके दक्षिण भागकी रक्षा की थी ( भीष्म० ५५ । १८ ) ।
  • इन दोनों भाइयोंका अर्जुनके साथ युद्ध और उनके द्वारा इनका वध ( द्रोण० ९३ । ६२—६४ ) ।

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