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सनत्कुमार

  • एक ऋषि, जो भूतलरपर प्रद्युम्नके रूपमें अवतीर्ण हुए थे ( आदि० ६७ । १५२ ) ।
  • इन्होंने
  • ब्रह्मलोकमें आकर राजा पुरुको समझाया था ( आदि० ९५ । २१-२२ ) ।
  • महातपस्वी भगवान् मनत्कुमार ब्रह्मामें रहकर उनकी उपासना करते हैं ( सभा० ११ । २२ ) ।
  • कनकखलके पास महानदी गङ्गाके तटपर इन्हें सिद्धि प्राप्त हुई थी ( वन० १३५ । ५ ) ।
  • इनके द्वारा गौतम और अत्रिके विवादका निर्णय ( वन० १८५ । २०-२१ ) ।
  • ये शरशय्यापर पड़े हुए भीष्मजीके पास उन्हें देखनेके लिये आये थे ( शान्ति० ४७ । ८ ) ।
  • विभाण्डक आदि ऋषियोंको इनका उपदेश ( शान्ति० २२३ अ० दा० पाठ ) ।
  • वृत्रासुरको आध्यात्मिक उपदेश ( शान्ति० २८० । ७-५६ ) ।
  • इन्होंने गन्धर्वराज विश्वावसुको किसी समय उपदेश किया था ( शान्ति० ३१८ । ६१ ) ।
  • इनका उपनिषदोंमें उपदेश ( शान्ति० ३२१ । ५-७ ) ।
  • ये ब्रह्माजीके मानसपुत्र हैं । इन्हें स्वयं विज्ञान प्राप्त है और ये निवृत्ति-धर्ममें स्थित हैं । ये प्रमुख योगवेत्ता, सांख्यज्ञान-विशारद, धर्मशास्त्रोंके आचार्य तथा मोक्षधर्मके प्रवर्तक हैं ( शान्ति० ३४१ । ७२-७४ ) ।
  • इन्होंने ब्रह्माजीसे सात्वतधर्मका उपदेश ग्रहण किया और इनसे वीरन प्रजापतिको इस धर्मका उपदेश प्राप्त हुआ ( शान्ति० ३४८ । ४०-४१ ) ।
  • प्रद्युम्न स्वर्गमें जानेपर इन्हींके स्वरूपमें प्रविष्ट हो गये थे ( स्वर्गा० ५ । १३ ) ।

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