← अनुक्रमणिका

सम्पाति

  • (१) विवस्वान्दनन्दन अरुणके प्रथम पुत्र । इनकी माताका नाम श्येनी और इनके छोटे भाईका नाम जटायु था ( आदि० ६७ । ७०-७१ ) ।
  • इन्होंने हनुमान्जी आदि वानरोंको सीताके सम्बन्धमें यह समाचार दिया था कि वे रावणपुरी लङ्कामें विद्यमान हैं ( वन० २४८ । ५ ) ।
  • इनका आमरण अनशनके लिये बैठकर बातचीतके प्रसंगमें जटायुकी चर्चा करनेवाले वानरोंसे जटायुका समाचार पूछना, अपनेको उनका भाई बताना तथा जटायुके साथ सूर्यमण्डलके समीपतक उड़कर जानेसे अपने पङ्खोंके जलने और पर्वतशिखरपर गिरनेका वृत्तान्त सुनाना; फिर वानरोंके मुखसे सीता-हरण एवं जटायु-मरणका समाचार सुनकर भाईके लिये दुखी होना तथा लङ्कामें सीताजीके होनेकी निश्चित सम्भावना बताकर वानरोंको वहाँ जानेके लिये प्रेरित करना ( वन० २६२ । ४३-५० ) ।
  • (२) कौरवपक्षीय योद्धा, जो द्रोणनिर्मित गरुडव्यूहके हृदय-स्थानमें विशाल सेनाके साथ खड़े थे ( द्रोण० २० । १२ ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in