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सरयू

  • (१) हिमालयके स्वर्णाशिखरसे निकली हुई गङ्गाकी सात धाराओंमेंसे एक । जो इसका जल पीते हैं, उनके पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं ( आदि० १६९ । २०-२१ ) ।
  • यह वरुणकी सभामें रहकर उनकी उपासना करती है ( सभा० ८ । २२ ) ।
  • इन्द्रप्रस्थसे गिरिव्रजको जाते हुए श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनने मार्गमें इसे पार किया था ( सभा० २० । २८ ) ।
  • गोप्रतार नामक तीर्थ सरयूके ही जलमें है, जहाँ गोत लगाकर भगवान् श्रीरामने दल-बलसहित परमधामको प्रस्थान किया था ( वन० ८४ । ७०-७१ ) ।
  • यह नदी असिकी उत्पत्ति का स्थान है ( वन० २२२ । २२ ) ।
  • यह उन पवित्र नदियोंमें है, जिनका जल भारतवर्षकी प्रजा पीती है ( भीष्म० ९ । १९ ) ।
  • वसिष्ठजी कैलासकी ओर जाती हुई गङ्गाको मानसरोवरमें ले आये । वहीं आते ही गङ्गाजीने उस सरोवरका बाँध तोड़ दिया । गङ्गाके सरोवरका भेदन होनेपर जो स्रोत निकला; वह सरयूके नाममें प्रसिद्ध हुआ ( अनु० १५५ । २३-२४ ) ।

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