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साध्य

  • एक गणदेवता, विराट्-अण्डसे इनके प्रकट होनेका कथन ( आदि० १ । ३३ ) ।
  • अमृतके लिये गरुड और देवताओंमें युद्ध होते समय ये लोग पक्षी- राजसे पराजित हो भाग गये थे ( आदि० ३२ । १६ ) ।
  • विश्वामित्रके प्रभावसे इनके भयभीत रहनेकी चर्चा ( आदि० ७१ । ३९ ) ।
  • अर्जुनके जन्म-समयमें साध्यगण वहाँ पधारे थे ( आदि० १२२ । १० ) ।
  • द्रौपदीका स्वयंवर देखनेके लिये ये लोग विमानोंद्वारा द्रुपदनगरके आकाशमें स्थित थे ( आदि० १६६ । ६ ) ।
  • नैमिषा- रण्यक्षेत्रमें देवताओंद्वारा आयोजित यज्ञमें ये सब लोग पधारे थे ( आदि० १९६ । १३ ) ।
  • खाण्डवदाहके समय श्रीकृष्ण और अर्जुनके साथ युद्धके लिये ये नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र लेकर आये थे ( आदि० २२६ । २८ ) ।
  • साध्यगण इन्द्रकी सभामें विराजमान होते हैं ( सभा० ७ । २२ ) ।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें भी उनकी आराधनाके लिये उपस्थित होते हैं ( सभा० ११ । ४४ ) ।
  • स्कन्द और तारकासुरके युद्धके समय इन्होंने भी दानवोंके साथ युद्ध किया था ( वन० २३१ । ७३ ) ।
  • दत्तात्रेयजी- से उनकी उदार वाणी सुननेके लिये इनकी प्रार्थना ( उद्योग० २६ । २ ) ।
  • कर्ण और अर्जुनके युद्धमें इन्होंने अर्जुनकी ही विजयका समर्थन किया था ( कर्ण० ८७ । ४६ ) ।
  • स्कन्दके जन्मकालमें ये लोग उन्हें देखनेके लिये आये थे ( शल्य० ४४ । २९ ) ।
  • स्कन्दके अभिषेकके समय भी इनकी उपस्थिति थी ( शल्य० ४५ । ६ ) ।
  • इन्होंने स्कन्दको सेनापति अर्पित किये थे ( शल्य० ४७ । ५३ ) ।
  • ये लोग राजा मरुत्तके यज्ञमें रसोई परोसनेका काम करते थे ( शान्ति० २९ । २२ ) ।
  • साध्यगण धर्मके पुत्र कहे गये हैं ( शान्ति० २०० । २३ ) ।
  • हंसस्वरूपधारी ब्रह्मासे मोक्षविषयक इनका प्रश्न करना ( शान्ति० २९९ अध्याय ) ।
  • ये लोग मुञ्जवान् पर्वतपर भगवान् शिवकी आराधना करते हैं ( आश्व० ८ । १-४ ) ।
  • एक प्राचीन नरेश, जो यम-सभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १७ ) ।

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