← अनुक्रमणिका

साम्ब

  • (१) भगवान् श्रीकृष्णद्वारा जाम्बवतीके गर्भसे उत्पन्न एक यादव वीर। ये द्रौपदीके स्वयंवरमें पधारे थे ( आदि० १८५ । १७ ) ।
  • अर्जुन और सुभद्राके लिये दहेज लेकर आये थे ( आदि० २२० । ३२ ) ।
  • इन्होंने अर्जुनसे धनुर्वेदकी शिक्षा प्राप्त की थी और ये युधिष्ठिरकी सभामें विराजते थे ( सभा० ४ । ३४-३५ ) ।
  • द्वारकाके सात अतिरथी वीरोंमें एक ये भी थे ( सभा० १४ । ५० ) ।
  • युधिष्ठिरके राजसूययज्ञमें भी उपस्थित थे ( सभा० २९ । १६ ) ।
  • इनका शाल्वके सेनापति एवं मन्त्री क्षेमवृद्धिके साथ युद्ध और इनके द्वारा उसकी पराजय ( वन० १६ । ९-१६ ) ।
  • वेगवान् नामक दैत्यके साथ युद्ध और इनके द्वारा उसका वध ( वन० १६ । १७-२० ) ।
  • प्रभासक्षेत्रमें इकट्ठे हुए वृष्णिवंशियों तथा पाण्डवोंके बीच सात्यकिद्वारा बलरामके प्रति इनके पराक्रमका वर्णन ( वन० १२० । १२-१४ ) ।
  • ये उपप्लव्यनगरमें अभिमन्युके विवाहोत्सवमें आये थे ( विराट० ७२ । २२ ) ।
  • इनका युधिष्ठिरके अश्वमेधयज्ञके अवसरपर श्रीकृष्णके साथ हस्तिनापुरमें आगमन ( आश्रम० ६६ । ३ ) ।
  • सारण आदि वीरोंका साम्बको स्त्रीवेषमें विभूषित करके ऋषियोंके पास ले जाना और उनसे पूछना कि यह यमकी पत्नी है, आपलोग बताइये कि इसके गर्भसे क्या उत्पन्न होगा ? ( मौसल० १ । १४-१७ ) ।
  • ऋषियोंने कहा—भगवान् श्रीकृष्णका यह पुत्र साम्ब एक भयंकर लोहेका मूसल उत्पन्न करेगा, जो वृष्णि और अन्धकवंशके विनाशका कारण होगा ( मौसल० १ । १९ ) ।
  • दूसरे दिन सवेरा होते ही इनके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति ( मौसल० १ । २५ ) ।
  • मौसल-युद्धमें इनका मारा जाना ( मौसल० ३ । ४४ ) ।
  • मृत्युके पश्चात् ये विश्वदेवगणमें प्रविष्ट हो गये ( स्वर्ग० ५ । १६-१८ ) ।
  • (२) एक सदाचारी तथा अर्थज्ञानमें निपुण ब्राह्मण, जिन्होंने धृतराष्ट्रके वनगमनके लिये आज्ञा माँगनेपर प्रजाकी ओरसे उन्हें सान्त्वनापूर्ण उत्तर दिया था ( आश्रम० १० । १३-५० ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in