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सीता

  • (१) महाराज जनककी पुत्री । राजा जनकके यहाँ धनुषयज्ञमें शिवजीके धनुषको तोड़नेपर श्रीरामजीके साथ श्रीसीताका विवाह हुआ । इनको साथ लेकर श्रीराम अयोध्यापुरीमें गये और वहाँ आनन्दपूर्वक रहने लगे । श्रीरामके वनवासके समय परम रूपवती धर्मपत्नी सीता भी उनके साथ गयी थीं । अवतारके पूर्व विष्णु रूपमें रहते समय उनके साथ जो लक्ष्मी रहा करती हैं, वे ही अवतारकालमें सीताके रूपमें अवतीर्ण हो पतिदेवका अनुसरण करती थीं । रावणद्वारा इनका हरण होनेपर श्रीरामने रावणको मारकर इन्हें प्राप्त किया और इनके साथ अयोध्यामें आकर धर्मपूर्वक राज्यका पालन करने लगे ( सभा० ३८ । २९ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ७९४-७९५ ) ।
  • ( वनपर्वमें पुनः इनकी कथा आयी है यथा—) जनकनन्दिनी सीताका श्रीरामके साथ वनगमन ( वन० २७७ । २९ ) ।
  • इनका श्रीरामको कपटमृग वधके लिये कहना ( वन० २७८ । १८ ) ।
  • इनका लक्ष्मणके प्रति संदेहपूर्ण कठोर वचन ( वन० २७८ । २७-२९ ) ।

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