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रावणद्वारा

  • अपहरण ( वन० २७८ । ४३ ) ।
  • अशोकवाटिका में त्रिजटा द्वारा आश्वासन ( वन० २८० । ५५-५२ ) ।
  • इनका रावणके साथ संवाद ( वन० २८१ अध्याय ) ।
  • इनका हनुमान्‌जीको पहिचानके लिये चूड़ामणि देना ( वन० २८२ । ६८-६९ ) ।
  • रावण वधके पश्चात् अग्निमें और विभाषणने सीताजीको श्रीरामके पास ले आकर समर्पित किया । श्रीरामने इनके चरित्र पर संदेह करके इन्हें त्याग दिया । सीताको इससे बड़ी व्यथा हुई । इन्होंने अपनी शुद्धिके लिये शपथ खायी और देवताओंने भी इनकी शुद्धिका समर्थन किया गया है । इससे श्रीरामचन्द्रजी प्रसन्नतापूर्वक सीताजीसे मिले । सीताको आगे करके पुष्पक-विमानपर आरूढ़ हो कपट समुद्रके पार गये । सीताको वनकी शोभा दिखाते और किष्किन्धा होते हुए अयोध्यापुरीमें गये । इनका दर्शन करके भरत-शत्रुघ्नको बड़ा हर्ष प्राप्त हुआ ( वन० २९१ । ३९-४५ ) ।
  • इनके पातिव्रत्यकी प्रशंसा ( विराट० २९ । १२-१३ ) ।
  • ( २ ) एक नदी, जिसे मार्कण्डेयजीने भगवान् बालमुकुन्दके उदरमें देखा था ( वन० १८८ । १०२ ) ।
  • यह गंगा की सात धाराओंमेंसे एक है ( भीष्म० ६ । ४०-४८ ) ।
  • इसमें प्रायः नाव भी डूब जाती है ( शान्ति० ८२ । ४५ ) ।

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