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सुकन्या

  • (१) राजा शर्याति की सुन्दरी पुत्री ( वन० १२२ । ६ ) ।
  • इनका वनमें एकान्तभ्रमण । च्यवनको इसके दर्शनसे प्रसन्नता । इनके द्वारा बाँबीके ढेरमें छिपे हुए मुनिवर च्यवनकी आँखोंका फोड़ा जाना ( वन० १२२ । ६-१४ ) ।
  • मुनिके कोपसे सेना और पिताको पीड़ित देख इनका अपने द्वारा दो चमकीली वस्तुओंके बेधे जानेकी बात बताना ( वन० १२२ । २०-२१ ) ।
  • मुनिके माँगनेपर पिता द्वारा इसका उन्हें समर्पण ( वन० १२२ । २४-२६ ) ।
  • इनके द्वारा पतिकी परिचर्या एवं आराधना ( वन० १२२ । २८-२९ ) ।
  • मोहित अश्विनीकुमारोंका दातोंका इसके द्वारा विरोध ( वन० १२२ । ३४-३६ ) ।
  • इनका रतिसे सलाह लेकर अश्विनी कुमारोंसे उन्हें रूपयौवनसम्पन्न बनानेकी प्रार्थना करना ( वन० १२२ । ३७-३९ ) ।
  • इनका अश्विनीकुमारोंके बीच अपने पतिको पहचानकर इन्हें ही स्वीकार करना ( वन० १२२ । ३९ ) ।
  • इनके पातिव्रत्यकी प्रशंसा ( विराट० २९ । १० ) ।
  • ( २ ) मातरिश्वाकी पत्नी, जिसके गर्भमें मङ्गणक मुनिका जन्म हुआ था ( शल्य० २८ । ५९ ) ।

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