← अनुक्रमणिका

सुग्रीव

  • (१) वानरोंके एक राजा, जो भगवान् सूर्यके पुत्र थे । पूर्वकालमें सभी वानरयुवति इनकी सेवामें रहते थे ( वन० २७० । २८-२९ ) ।
  • श्रीरामकी इनके साथ मित्रता और इनके भाई वालीके वधका संक्षिप्त वृत्तान्त ( सभा० ३८ । २९ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ८१५ ) ।
  • भगवान् श्रीरामका इनके पास जनकके वस्त्र दिखाना, श्रीरामका इन्हें वानरसम्प्रभुके पदपर अभिषिक्त करना तथा सुग्रीवका सीताजीकी खोजके लिये प्रतिज्ञा करना ( वन० २८० । ९-१४ ) ।
  • इनका अपने भाई वालीके साथ युद्ध ( वन० २८१ । ३०-३६ ) ।
  • श्रीरामसे सीताकी खोजके विषयमें इनका अपना कार्य बताना ( वन० २८२ । १२ ) ।
  • कुम्भकर्णद्वारा इनका अपहरण ( वन० २८७ । १९ ) ।
  • श्रीरामके साथ पुष्पकविमानद्वारा इनका अयोध्याको आना ( वन० २९१ । ६० ) ।
  • राज्याभिषेकके बाद श्रीरामका इन्हें कर्तव्यकी शिक्षा दे बड़े दुःखसे विदा करना ( वन० २९२ । ६७-६८ ) ।
  • ( २ ) भगवान् श्रीकृष्णके रथके एक अश्वका नाम ( द्रोण० १४७ । ४७ ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in