← अनुक्रमणिका

सुदेव

  • (१) विदर्भनरेश दमयन्तीकी खोजमें नियुक्त किये गये ब्राह्मणोंमें एक, जिन्होंने चेदिराजके महलमें दमयन्तीको पहचानकर उनसे वार्तालाप किया ( वन० ६९ । २-३० ) ।
  • इनका चेदिनरेशकी माताको दमयन्तीका परिचय देना ( वन० ६९ । १-३ ) ।
  • दमयन्तीको देखकर प्रसन्न हुए राजा भीमद्वारा इन्हें पुरस्कार-प्राप्ति ( वन० ६९ । १० ) ।
  • दमयन्तीका इन्हें अयोध्यानरेश ऋतुपर्णके पास स्वयंवरका संदेश देकर भेजना और इनका अयोध्या जाकर राजा ऋतुपर्ण स्वयंवरके लिये दमयन्तीका संदेश कहना ( वन० ७० । २२-२७ ) ।
  • (२) महाराज अम्बरीषका एक शान्त स्वभाववाला सेनापति, जिसे राजाने पूर्व ही इन्द्रके पास स्वर्गलोककी प्राप्ति हो चुकी थी। राजाकी आज्ञामें राक्षसोंसे लड़नेके लिये इसका प्रस्थान ( शान्ति० ९८ । ११ के बाद दा० पाठ ) ।
  • शत्रुको प्रबल देखकर इसका शिवजीको शरणमें जाना और उन्हें प्रसन्न करना ( शान्ति० ९८ । ११ के बाद दा० पाठ ) ।
  • शिवजीद्वारा हम वरदान-प्राप्ति ( शान्ति० ९८ । ११ के बाद दा० पाठ ) ।
  • इसके द्वारा राक्षसोंका संहार और स्वयं भी विषमद्वारा मारा जाना तथा मरते-मरते विषमको भी मार डालना ( शान्ति० ९८ । ११ के बाद दा० पाठ ) ।
  • (३) काशिराजके एक पुत्र, जो देवताके समान तेजस्वी और दूसरे धर्मराजके समान न्यायप्रिय थे। पिताके पश्चात्‌ ये काशिराजके पदपर अभिषिक्त हुए। इसी बीच वीतहव्यके पुत्रोंने इनके आक्रमण करके इन्हें धराशायी कर दिया। तत्पश्चात्‌ इनके पुत्र दिवोदाम पिताके राज्यपर अभिषिक्त हुए ( अनु० ३० । १३-१५ ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in