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सुदेष्णा

  • मत्स्यराज विराटकी भार्या, केकयराजकी कन्या। इनका दूसरा नाम चित्रा भी था ( विराट० ९ । ६ ) ।
  • इनके पास अज्ञातवासके लिये सैरन्ध्रीवेषमें द्रौपदीका आना और बातचीत करनेके बाद इनका द्रौपदीकी शतोंको स्वीकार करते हुए उसे अपने यहाँ आश्रय देना ( विराट० ९ । ८-३६ ) ।
  • सैरन्ध्रीके विषयमें इनमें कामात्मक बातचीत और उसके प्रार्थना करनेपर इनका उसे कीचकके घर भेजना ( विराट० १४ । ६-१० ) ।
  • द्रौपदीको कीचकके मारनेपर रोती हुई द्रौपदीका इनके पास आना और इनका उसके रोनेका कारण पूछना तथा आश्वासन देना ( विराट० १६ । ४८-५० ) ।
  • द्रौपदीको चली जानेके लिये कहलवाना ( विराट० २४ । ८-१० ) ।
  • द्रौपदीको राजमहलमें रहनेके लिये इनके द्वारा राजाका संदेश सुनाया जाना ( विराट० २४ । २४-२८ ) ।
  • द्रौपदीके तेरह दिन और रहनेके लिये प्रार्थना करनेपर सुदेष्णाका उसे इच्छानुसार रहनेकी आज्ञा देना और अपने पति-पुत्रकी रक्षाके लिये उसकी शरणमें जाना ( विराट० २४ । २९-३० दाक्षिणात्य पाठसहित ) ।
  • विवाहोलवमें उपप्लव्यनगरमें इनका द्रौपदीके पास जाना ( विराट० ७२ । ३० ) ।

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