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सुबल

  • (१) एक प्राचीन नरेश ( आदि० ९ । २३६ ) ।
  • (२)गान्धार देशके एक राजा, जो प्रह्लादशिष्य नग्नजित्के वंशमें उत्पन्न हुए थे । इनकी पुत्री गान्धारी, जो दुर्योधनकी माता थी, गान्धारी नामसे प्रसिद्ध थी । ये दोनों भाई-बहन अर्थशास्त्रके ज्ञानमें निपुण थे ( आदि० ६३ । १११-११२ ) ।
  • भीष्मने जब धृतराष्ट्रके लिये गान्धारीका वरण करनेके निमित्त गान्धारराजके पास अपना दूत भेजा था, तब ‘धृतराष्ट्र अंधे हैं’ इस बातको लेकर राजा सुबलके मनमें बड़ा विचार हुआ था, परंतु अपने कुलप्रसिद्ध तथा आचार-विचारके विषयमें बुद्धिपूवर्क सोच-समझकर इन्होंने अपनी कन्या गान्धारीका वाग्दान कर दिया ( आदि० १०१ । ११-१२ ) ।
  • युधिष्ठिरके राजसूय-यज्ञमें गान्धारराज सुबल अपने महाबली पुत्र शकुनि, अचल और वृषकके साथ पधारे थे ( सभा० ३० । ६-७ ) ।
  • राजसूय-यज्ञकी समाप्ति के बाद जब युधिष्ठिरने सुबल अपने राज्यको पधारने लगे, तब नकुलने साथ जाकर इन्हें अपने राज्यकी सीमातक पहुँचाया था ( सभा० ४५ । ४५ ) ।
  • (३) एक इक्ष्वाकुवंशी राजा, जिनका पुत्र जयद्रथका सार्थी था ( वन० २६५ । १८ ) ।
  • (४) अपने वंशका विस्तार करनेवाला गरुड़का एक पुत्र ( उद्योग० १०३ । १६ ) ।

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