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सुबाहु

  • (१) कश्यप और कद्रूकी परम्परामें उत्पन्न एक प्रमुख नाग ( आदि० ३५ । १४४; उद्योग० १०३ । १६ ) ।
  • (२) एक अप्सरा, जो दक्ष-कन्या प्राधाके गर्भमें महर्षि कश्यपद्वारा उत्पन्न हुई थी ( आदि० ६५ । ५० ) ।
  • यह अर्जुनके जन्मकालमें नृत्य करने आयी थी ( आदि० १२२ । ६३ ) ।
  • (३) एक क्षत्रिय राजा, जो हर नामक दानवके अंशसे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । २३-२४ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इसे रण-निमन्त्रण भेजनेका निश्चय हुआ था ( उद्योग० ४ । १४ ) ।
  • (४) एक राजा, जो क्रोधवश नामक दैत्यके अंशसे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । ६० ) ।
  • (५) धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० ६७ । ७३; आदि० ११६ । ३ ) ।
  • भीमसेनद्वारा इसका वध ( भीष्म० ९६ । २६-२७ ) ।
  • (६) काशीके एक राजा, जो युद्धमें पीठ दिखानेवाले नहीं थे । भीमसेनने इसे परास्त कर दिया ( द्रोण० ६३ । ४-६ ) ।
  • (७) एक राक्षस, जो ताटका नामक राक्षसीका पुत्र सुकुमार भी था ( आदि० १८४ । २९ के बाद दा० पाठ, पृष्ठ ७९४ ) ।
  • (८) चेदिदेशके च्एक राजा, जो वीरबाहुके पुत्र और दमनयन्तीके मौसेरे भाई थे ( वन० २६५ । १९-२० ) ।
  • (९) कुलिनदोंका एक राजा, इसका राज्य और नगर हिमालयके बहुत निकट था । वहाँ अनेक प्रकारकी आश्चर्यजनक वस्तुएँ दिखायी देती थीं । वहाँ हाथी-घोड़ोंकी बहुतायत थी । किरात, तङ्गण एवं कुलिनद आदि जातियोंके लोग वहाँ निवास करते थे । वह प्रदेश देवताओंसे भी सेवित था । सुबाहुने राजसूय सीमान्तपर जाकर पाण्डवोंको बड़े आदर-सत्कारके साथ अपनाया, इससे पूजित हो वे सब लोग वहाँ सुखमें रहे । दूसरे दिन पाण्डवोंके जानेके समय सुबाहुने तथा द्रौपदीके सामानोंको सौंपकर उनको प्रस्थान किया था ( वन० १४० । २४-२८ ) ।
  • यह महाभारतयुद्धमें पाण्डवपक्षकी ओरसे आया था । जयद्रथ-वधकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये श्रीकृष्णने युधिष्ठिरसे जब प्रार्थना की थी, उस दिन उनके शिविरमें सुबाहु भी उपस्थित था ( द्रोण० ६३ । ४-६ ) ।
  • (१०) एक संशप्तक योद्धा । अर्जुनके साथ इसका युद्ध ( द्रोण० १८ । १९-२० ) ।
  • युयुत्सुके साथ युद्ध और उनके द्वारा इसकी दोनों भुजाओंका काटा जाना ( द्रोण० २५ । १३-१४ ) ।
  • (११) स्कन्दका एक सैनिक ( शल्य० ४५ । ७ ) ।
  • (१२) एक प्राचीन नरेश, जिन्होंने अपने जीवनमें कभी मांस नहीं खाया था ( अनु० ११५ । ६६ ) ।

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