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सुभद्रा

  • (१) वसुदेवजीकी पुत्री ( आदि० २१८ । १४-१८ ) ।
  • भगवान् श्रीकृष्ण और सारणकी सगी बहन
  • ( आदि० २१८ । १७-१८ ) ।
  • ये अपने पिताकी बड़ी लाड़ली थीं ( आदि० २१८ । १७ ) ।
  • अर्जुनका इनके प्रति अनुराग और श्रीकृष्णके मनमें इन्हें अपनी रानी बनानेका मनोभाव प्रकट करना ( आदि० २१८ । १९ ) ।
  • श्रीकृष्णकी सलाहसे रैवतक पर्वतके उत्सवपर परिक्रमाके समय अर्जुनद्वारा इनका अपहरण ( आदि० २१९ । ६-८ ) ।
  • अर्जुनके साथ इनका विधिपूर्वक विवाह ( आदि० २२० । १३ ) ।
  • अर्जुनकी प्रेरणासे गोपवेषमें इनका द्रौपदीके पास आगमन तथा इनके लिये द्वारकासे दहेजकी आना ( आदि० २२० । ६५-६६ ) ।
  • इनके अभिमन्युका जन्म ( आदि० २२० । ६७ ) ।
  • पाण्डवोंके वनवास होनेपर वनमें अभिमन्युसहित ये श्रीकृष्णके साथ द्वारका चली गयी थीं ( वन० २२ । ३-४ ) ।
  • उपप्लव्यनगरमें अभिमन्युके विवाहोत्सवमें इनका आना ( विराट० ७२ । २२ ) ।
  • पुत्रशोकसे दुखी होनेपर इन्हें श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन ( द्रोण० ७७ । १२-१४ ) ।
  • श्रीकृष्णके समक्ष अभिमन्युके लिये इनका विलाप ( द्रोण० ७८ । २-३५ ) ।
  • श्रीकृष्णके साथ हस्तिनापुर द्वारकाको प्रस्थान ( आश्र० ५२ । ५५ ) ।
  • वसुदेवजीके समक्ष अभिमन्यु-वधका वृत्तान्त कहनेके लिये कहकर मूर्छित होना ( आश्र० ६१ । ४ ) ।
  • युधिष्ठिरके अश्वमेधयज्ञमें सम्मिलित होनेके लिये द्वारकासे हस्तिनापुर आना ( आश्र० ६६ । ५ ) ।
  • उत्तराके मृत पुत्रको जिलानेके लिये इनकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना ( आश्र० ७० अध्याय ) ।
  • परीक्षितके जीवित होनेमें इनकी प्रसन्नता ( आश्र० ७० । १-७ ) ।
  • इनका उलूपी और चित्राङ्गदासे मिलना तथा उन दोनोंको उपहार देना ( आश्र० ८८ । ३-४ ) ।
  • ये कुन्ती और गान्धारी दोनों सासुओंकी समान भावसे सेवा करती थीं ( आश्र० ९१ । ९ ) ।
  • ये अभिमन्युके लिये चिन्तित रहनेके कारण मदा अप्रमन एवं हर्षशून्य रहा करती थीं । केवल परीक्षित्‌को देखकर जीवन धारण करती थीं ( आश्र० ९१ । १५-१६ ) ।
  • संजयका युधिष्ठिरके समक्ष इनका परिचय देना ( आश्र० ९५ । १० ) ।
  • गान्धारीका व्यासजीके समक्ष इन्हें पुत्रशोकमें सन्तप्त बताना ( आश्र० ९५ । ४२ ) ।
  • युधिष्ठिरका दुःखमें आते हुए सुभद्राका परीक्षित् एवं वज्रका पालन करनेके लिये कहना ( महाप्रस्था० १ । ७-९ ) ।
  • ( २ ) रमिकी एक धेनुरूपा पुत्री, जो पश्चिमदिशाकी धारण करनेवाली है ( उद्योग० १०२ । ९ ) ।

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